मध्य प्रदेश शासन
अरबों के बजट में हमारे लिए सिर्फ ‘शून्य’ दिव्याग दीपक गुप्ता का सरकार से सीधा सवाल!*
**MP बजट 2026-27 में दिव्यांगों की घोर अनदेखी; मध्य प्रदेश के लाखों दिव्यांगों की ओर से 'बजट' नहीं, 'इंसाफ' की मांग!**
**भोपाल/ |** मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर अपनी पीठ थपथपा ली है। चारों तरफ 'विकास' और 'आत्मनिर्भरता' का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन दिव्यांग नागरिक** होने के नाते, सरकार से पूछना चाहता हूँ—**"क्या इस विकसित मध्य प्रदेश के नक्शे में हम दिव्यांगों के लिए कोई जगह है?"** हाल ही में पेश किए गए बजट दस्तावेजों को खंगालने के बाद दिल दहल जाता है। सरकार ने लाडली बहनों के लिए खजाना खोला, इंफ्रास्ट्रक्चर पर करोड़ों लुटाए, लेकिन प्रदेश के लाखों दिव्यांगों के लिए न तो पेंशन में कोई सम्मानजनक वृद्धि की गई और न ही उनके रोजगार के लिए कोई विशेष प्रावधान दिखा। क्या ₹600 की सरकारी खैरात में आज के दौर में एक दिव्यांग सम्मान से जी सकता है? क्या सरकार को हमारी दवाइयों, हमारे व्हीलचेयर और हमारी बुनियादी जरूरतों की महंगाई नजर नहीं आती? प्रधानमंत्री मोदी जी हमें 'दिव्यांग' कहकर सम्मान देते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश का यह बजट हमें 'बेचारा' बनाकर छोड़ देता है। बजट में बड़ी-बड़ी योजनाओं के नाम पर आंकड़ों की बाजीगरी की गई, लेकिन दिव्यांग कल्याण विभाग के हिस्से में वही पुराना और ऊबाऊ बजट थमा दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, क्या आपका 'रामराज्य' समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भूखा रखकर बनेगा?
सदन में विपक्ष ने भी इस अनदेखी पर चुप्पी साध ली। रीवा संभाग से लेकर भोपाल तक बैठे सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी सिर्फ फाइलों में विकास दिखाते हैं, जबकि जमीन पर 3-3 महीने से पेंशन तक नसीब नहीं हो रही है। यह सिर्फ बजट की कमी नहीं, बल्कि सरकार की 'नियत' की कमी है। मैं दिव्याग दीपक गुप्ता, मध्य प्रदेश के समस्त दिव्यांग भाई-बहनों की ओर से यह चेतावनी देता हूँ—हमारी खामोशी को हमारी कमजोरी न समझें। यह बजट हमारे साथ किया गया एक 'क्रूर मजाक' है। यदि सरकार ने तत्काल दिव्यांगों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और पेंशन वृद्धि की घोषणा नहीं की, तो हम अपनी बैसाखियों और व्हीलचेयर के साथ सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।