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special-intensive-revision-sir-exercise : चुनाव आयोग की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ प्रक्रिया को लेकर बवाल

प्रकाशित: 26 Jul 2025

नई दिल्ली, 25 जुलाई।
भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से घोषणा की कि वह देशभर में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लागू करने जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट की गहन समीक्षा की जाएगी, जिससे मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जा सके। हालांकि, इस घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग की इस कवायद पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे "वोटबंदी की साजिश" करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार और उसके सहयोगी संगठन आरएसएस (RSS) इस प्रक्रिया के जरिए दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और वंचित तबकों के वोट काटने की योजना पर काम कर रहे हैं।

चुनाव आयोग पर निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है, लेकिन वह अब भाजपा और आरएसएस के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। नेताओं का कहना है कि SIR को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कमजोर वर्गों को मतदाता सूची से बाहर किया जा सके।

बिहार में पहले से चल रही इसी तरह की प्रक्रिया को उदाहरण देते हुए बताया गया कि किस तरह BLO (Booth Level Officers) कुछ खास समुदायों के लोगों से अनावश्यक रूप से नए फॉर्म भरवा रहे हैं और पुराने वोटर हटाए जा रहे हैं। आरोप है कि यह रणनीति अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जा रही है।

संविधान और लोकतंत्र पर 'सुनियोजित हमला'?

कई नेताओं ने इस मुद्दे को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ "सुनियोजित हमला" करार दिया है। उनका कहना है कि भाजपा को डॉ. भीमराव अंबेडकर और पंडित नेहरू द्वारा बनाए गए संविधान से परेशानी है और वह बार-बार उसमें बदलाव के प्रयास कर रही है। विपक्ष का मानना है कि SIR जैसी प्रक्रिया को लागू कर, सरकार एक ‘मनुस्मृति आधारित शासन व्यवस्था’ की ओर बढ़ रही है।

चुनाव आयोग की मंशा पर उठे सवाल

हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को साफ-सुथरा और अद्यतन बनाना है ताकि डुप्लीकेट, मृत और गलत नामों को हटाया जा सके। लेकिन इस पर अब संदेह जताया जा रहा है कि कहीं इसके जरिए एक छुपा हुआ राजनीतिक उद्देश्य तो पूरा नहीं किया जा रहा?

निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग

विपक्ष और कई नागरिक संगठनों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि SIR प्रक्रिया को लागू करने से पहले सार्वजनिक चर्चा, पारदर्शिता, और निगरानी की स्वतंत्र व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि इससे किसी भी समाज के वर्ग को भेदभावपूर्ण तरीके से मताधिकार से वंचित न किया जाए।

देश के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और समावेशिता पर उठ रहे सवाल न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि यह लोकतंत्र की बुनियादी आत्मा को भी झकझोरते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या जवाब देता है, और SIR प्रक्रिया को कैसे निष्पक्ष और पारदर्शी बनाता

🚨 चुनाव आयोग ने देशभर में Special Intensive Revision (SIR) लागू करने का एलान किया है।

विपक्ष का आरोप —
SIR के ज़रिए दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यकों के वोट काटने की साज़िश!
क्या ये ‘वोटबंदी’ नहीं?
EC की निष्पक्षता पर उठे सवाल।@RahulGandhi #ElectionCommission #SIR @kharge pic.twitter.com/pBS7KVpC9E

— PHM NEWS (@PHM_NEWS) July 25, 2025