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चित्रों में उतरी आस्था, सुरों में बही भक्ति–धारा

प्रकाशित: 30 Sep 2025

गोरखपुर।

बक्शीपुर स्थित श्रीचित्रगुप्त मंदिर परिसर रविवार को रंग, संगीत और साधना का ऐसा संगम बना कि पूरा परिसर चित्रशाला और भक्ति–मंडप में बदल गया। पुरवाई कला एवं श्रीचित्रगुप्त महिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय “आदिशक्ति चित्रकला प्रदर्शनी” का अविस्मरणीय समापन हुआ।

लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर, महाराजगंज और गोरखपुर के 30 चित्र–साधकों ने माँ दुर्गा के विविध स्वरूपों को कैनवास पर इस भाव से उतारा कि दीवारें भी भक्ति का स्पंदन महसूस करती रहीं।

“कैनवास भी बन गया आराधना–वेदी”

समापन समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय स्टेट बैंक के उप महाप्रबंधक कुमार आनंद ने कहा—

“देवी की नौ शक्तियों को रंगों में उतारना केवल चित्रण नहीं, आत्मा की तपस्या है। यहां की कृतियाँ दर्शकों के हृदय को आलोकित करती हैं।”

विशिष्ट अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. गौरीशंकर चौहान ने कहा—

“कलाकार की तूलिका जब देवी को रचती है, तब वह श्रद्धा और भक्ति से संचालित होती है। ये कृतियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगी।”

नौ मातृशक्तियों का सम्मान

समारोह में समाज, शिक्षा और संस्कृति में योगदान देने वाली नौ महिलाओं का सम्मान किया गया।

सम्मानित हुईं—

जयश्री लाहिड़ी, सुमन टंडन, सावित्री दास, विमला श्रीवास्तव, पुष्पा वर्मा, मृदुला श्रीवास्तव, कुसुम लता, मधुबाला खरे और गीता श्रीवास्तव।

भक्ति संगीत ने बाँधा समापन

भजन संध्या की शुरुआत “पचरा निमिया क डार मइया” से हुई। हृदया त्रिपाठी, प्रमिला दुबे, अंकिता त्रिपाठी, सारिका श्रीवास्तव, नीतू श्रीवास्तव, अनीता सिंह, अमिता श्रीवास्तव, प्रत्युषा और श्रेयांशी श्रीवास्तव ने स्वर–साधना से वातावरण को भक्तिरस में डुबो दिया।

आर्गन पर रवींद्र कुमार और तबले पर केशव चंद ने संगत प्रदान की।

प्रदर्शित कृतियाँ बनीं केंद्रबिंदु

जिन कलाकारों की रचनाएँ प्रदर्शित हुईं, उनमें—

अनीता, ममता, रीना, धर्मराज, विष्णुदेव, धीरज, पूजा, विनय, पूंजिका, सुष्मिता, शक्ति, अन्नू, शीला, निलय, तोशिका, सुनील, प्रज्ञा, हरिकृष्णा, दीपक कुमार, प्राची, रितु, सीता, हर्ष, शिविका, शैलजा, शालिनी, शिवम और सुशील शामिल रहे।

संस्था अध्यक्ष रीता देवी श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। स्वागत ममता श्रीवास्तव ने किया, संचालन प्रेमनाथ ने संभाला और आभार अनीता श्रीवास्तव ने प्रकट किया।

दिलीप श्रीवास्तव, मनोज, विनिता श्रीवास्तव, प्रशांत मिश्र, संगीता, सुनील, प्रीति श्रीवास्तव, वत्सला त्रिपाठी, शालिनी वालानी, मोना शाह, छवि और सुधा राय सहित बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित रहे।