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आनंदलोक अस्पताल में ऑपरेशन के बाद युवक की मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

प्रकाशित: 09 Apr 2026

गोरखपुर के गोरखनाथ थाना क्षेत्र स्थित आनंदलोक अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन के बाद एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के बाद जहां परिजनों में भारी आक्रोश है, वहीं अस्पताल प्रबंधन लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, पीपीगंज थाना क्षेत्र के आजाद नगर भगवानपुर निवासी 27 वर्षीय अभिषेक मद्धेशिया बीते 31 मार्च को पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए खुद अपनी दोपहिया वाहन से आनंदलोक अस्पताल पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि अभिषेक उस समय पूरी तरह सामान्य हालत में थे और उन्हें किसी तरह की गंभीर समस्या नहीं थी।
परिजनों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद 1 अप्रैल को अचानक अस्पताल से अभिषेक की मौत की खबर दी गई, जिसे सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इस मामले में सबसे सनसनीखेज पहलू वह वीडियो है, जिसमें मृतक के पिता खुलकर डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो में पिता का कहना है कि उनके बेटे की मौत सामान्य नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी लापरवाही या हत्या का मामला है। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल के डॉक्टर और पूरी मेडिकल टीम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
वहीं, दूसरी ओर आनंदलोक अस्पताल के संचालक डॉ. आनंद अग्रवाल ने प्रेस वार्ता कर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है, लेकिन ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। डॉक्टर अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट में पट्टी छोड़ने का आरोप गलत है। उनके अनुसार, यह एक सामान्य चिकित्सीय प्रक्रिया का हिस्सा होता है, जिसे इलाज के दौरान जानबूझकर डाला जाता है और समय आने पर निकाला जाता है।
फिलहाल पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि यह मामला लापरवाही का है या कुछ और गंभीर।