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अटेवा ने बीएसए को सौंपा ज्ञापन

प्रकाशित: 19 Mar 2026

गोरखपुर।
जनपद में शिक्षकों के विभिन्न मुद्दों को लेकर अटेवा (ऑल टीचर्स एंड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन) ने एक बार फिर अपनी सक्रियता दिखाते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन अटेवा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार दुबे के नेतृत्व में जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों द्वारा सौंपा गया। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने बीएसए को हिन्दू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं और शिक्षकों के हित में सहयोग की अपेक्षा जताई।
ज्ञापन के माध्यम से अटेवा पदाधिकारियों ने सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर उठाई। उन्होंने कहा कि नई पेंशन योजना (NPS) शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर पा रही है, जिससे उनमें असंतोष व्याप्त है। अटेवा लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आंदोलनरत है और सरकार से इस पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा कर रहा है।
इसके साथ ही ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा आरटीई 2009 अधिनियम से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने का भी उठाया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि जो शिक्षक पहले से सेवा में कार्यरत हैं, उनके लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। इससे कई अनुभवी शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसे शिक्षकों को इस बाध्यता से मुक्त किया जाए, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी सेवाएं जारी रख सकें।
अटेवा प्रतिनिधियों ने बीएसए से अनुरोध किया कि संगठन द्वारा भविष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में प्रशासनिक सहयोग, समर्थन और मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखता रहेगा।
बीएसए कार्यालय पर ज्ञापन सौंपने के दौरान अटेवा के कई पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से पवन कुमार तिवारी, अखिलेश दीक्षित, राजकुमार, अर्जुन गुप्ता, वरुण कुमार दुबे, भुवनेश्वर सिंह, शिवप्रसाद शर्मा, संजय कुमार यादव और अरविंद कुमार यादव शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
अटेवा के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाएगा, जिससे शिक्षकों के बीच व्याप्त असंतोष कम होगा और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।