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गोरखपुर

प्रकाशित: 10 Jul 2026

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग ने एक बार फिर अपनी अकादमिक उत्कृष्टता का परिचय देते हुए भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) के प्रतिष्ठित शोध अनुदान में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस वर्ष विश्वविद्यालय के सात शोधार्थियों का चयन ICHR के शोध अनुदान के लिए हुआ है।
आईसीएचआर का शोध अनुदान लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की दो चरणों वाली चयन प्रक्रिया के बाद प्रदान किया जाता है। यह अनुदान इतिहास के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिया जाता है। वहीं, यूजीसी की जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए केवल लिखित परीक्षा आयोजित की जाती है।
विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थियों शुभांगी मिश्रा, पूजा श्रीवास्तव, सत्या निषाद, कुमारी संजू और अनन्या त्रिपाठी का चयन हुआ है। वहीं प्राचीन इतिहास विभाग की मनीषा कुमारी और रोशनी वर्मा ने भी इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थियों ने आईसीएचआर की इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी। लगातार दूसरे वर्ष मिली इस उपलब्धि को विभाग की मजबूत शोध परंपरा और गुणवत्तापूर्ण अकादमिक माहौल का प्रमाण माना जा रहा है।
इस सफलता पर मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार तिवारी तथा प्राचीन इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने सभी सफल शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विभाग में हो रहे उच्च स्तरीय शोध कार्य और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी विभाग के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते रहेंगे।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने भी सभी चयनित शोधार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और शोध को निरंतर बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा शोधार्थियों की यह सफलता उसी दिशा में किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है।