मिशन शक्ति के तहत डीआईजी ने छात्राओं को किया जागरूक, साइबर सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी
गोरखपुर। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति फेज 5.0 अभियान के अंतर्गत मंगलवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के सभागार में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) गोरखपुर परिक्षेत्र एस. चन्नप्पा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे और छात्र-छात्राओं को महिला सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया।
डीआईजी एस. चन्नप्पा ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक जितनी उपयोगी है, उतना ही उसके दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट, अनजान लिंक, ऑनलाइन ठगी और फोटो-वीडियो के दुरुपयोग जैसे खतरे लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने छात्राओं को विशेष सतर्कता बरतने और किसी भी संदिग्ध एक्टिविटी की तत्काल सूचना पुलिस को देने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि “सतर्कता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत हमारी लापरवाही होती है, इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सोच-समझकर करें।”
इस दौरान डीआईजी ने पुलिस की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबर 1090 (महिला शक्ति हेल्पलाइन), 112 (आपातकालीन सेवा), 1098 (बाल सहायता), और 1076 (मुख्यमंत्री हेल्पलाइन) की जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं से कहा कि किसी भी खतरे, उत्पीड़न, डर या उत्पात की स्थिति में तुरंत इन नंबरों का उपयोग करें।
कार्यक्रम में सीओ कैंट योगेंद्र सिंह, सीओ ऑफिस दीपांशी सिंह राठौर, निरीक्षक राजेश यादव और विश्वविद्यालय प्रशासन के सदस्य मौजूद रहे। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि महिला सुरक्षा और सहायता के लिए पुलिस तंत्र हर समय तत्पर है।
डीआईजी ने कहा, “महिला सुरक्षा केवल पुलिस की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है। जब बेटियां निडर होकर आगे बढ़ेंगी, तभी राष्ट्र मजबूत होगा। हमें हर हाल में ऐसा माहौल तैयार करना होगा जिसमें महिलाएं खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें।”
कार्यक्रम के अंत में कई छात्राओं ने खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति अभियान ने उनमें जागरूकता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ाया है। एक छात्रा ने कहा, “अब हमें भरोसा है कि जरूरत पड़ने पर पुलिस तुरंत मदद करेगी। हेल्पलाइन नंबर जानना हमारे लिए मजबूत सुरक्षा कवच जैसा है।”
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्राओं की मानसिक और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करते हैं और भविष्य में इस तरह की पहल को और व्यापक बनाया जाएगा।