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किसानों को खाद-बीज के लिए नहीं होना पड़ेगा परेशान — डीएम दीपक मीणा ने दिए सख्त निर्देश

प्रकाशित: 07 Nov 2025

गोरखपुर। जिले में किसानों को खाद-बीज की कमी से हो रही दिक्कतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने गुरुवार को कृषि विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को खाद या बीज के लिए लाइन में खड़ा होकर परेशानी नहीं झेलनी पड़े। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को सुविधा देना है, न कि उन्हें संकट में डालना।

डीएम दीपक मीणा ने कृषि अधिकारी और एडीएम (वित्त एवं सहकारिता) को फोन पर निर्देश दिए कि जिले के सभी वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक केंद्र पर किसानों को सुगमता से सामग्री मिलनी चाहिए और वितरण में किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

डीएम ने निर्देश दिया कि जहां भी किसानों की भीड़ या लंबी लाइनें लग रही हों, वहां संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर व्यवस्था संभालें। उन्होंने कहा कि किसान अनुशासित पंक्ति में खड़े रहें और उन्हें बिना किसी धक्का-मुक्की के खाद-बीज प्राप्त हो।

उन्होंने यह भी आदेश दिया कि प्रतिदिन सुबह 10 बजे तक कृषि विभाग द्वारा प्रत्येक वितरण केंद्र से उपलब्धता और वितरण की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाए। रिपोर्ट में यह उल्लेख हो कि किस केंद्र पर कितना स्टॉक उपलब्ध है, कितनी मात्रा वितरित हुई और कहां कमी या विलंब की स्थिति बनी हुई है। डीएम ने कहा कि जैसे ही किसी केंद्र पर स्टॉक की कमी की सूचना मिले, तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि बोआई कार्य प्रभावित न हो।

डीएम दीपक मीणा ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों की शिकायतों का निस्तारण उसी दिन किया जाए। यदि किसी केंद्र से शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित कृषि अधिकारी और एसडीएम मौके पर जाकर समस्या का समाधान करें। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही डीएम ने अपने कार्यालय में आए फरियादियों की समस्याओं को भी गंभीरता से सुना और मौके पर ही अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि “कोई भी फरियादी बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाए। उसकी समस्या का समाधान तुरंत किया जाए।”

डीएम ने कहा कि शासन की प्राथमिकता किसानों की सुविधा और खाद-बीज की सुचारू उपलब्धता है। जिले के अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि किसी किसान को न तो इंतजार करना पड़े और न ही आपूर्ति में कोई बाधा आए, ताकि रबी फसल की तैयारी निर्बाध रूप से चल सके।