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गोरखपुर का गौरव विश्व पटल पर आलोकित

प्रकाशित: 01 Nov 2025

गोरखपुर। सर्बिया में आयोजित U-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2025 में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले अंतरराष्ट्रीय कोच चंद्र विजय सिंह के गोरखपुर आगमन पर गुरुवार को रेलवे स्टेशन परिसर गौरव और उत्साह से गूंज उठा। पुष्पवृष्टि, नगाड़ों की थाप, तिरंगों की लहर और “जय भारत, जय गोरखपुर” के नारों से वातावरण देशभक्ति से सराबोर था।

यह ऐतिहासिक स्वागत समारोह युवा ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता के प्रतीक दीपक कुमार सिंह (दीपू) के निर्देशन में आयोजित हुआ। उनके नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं, खिलाड़ियों और नागरिकों ने स्टेशन पर पहुँचकर कोच चंद्र विजय सिंह का भव्य स्वागत किया। महिलाएँ आरती की थालियाँ लिए खड़ी थीं, बच्चे तिरंगे लहरा रहे थे और नगरवासी गर्व से जयघोष कर रहे थे।

दीपक सिंह (दीपू) ने स्वागत के दौरान कोच सिंह को माला पहनाकर सम्मानित किया और अपने कंधों पर उठाकर “जय भारत, जय गोरखपुर” का उद्घोष किया। पूरा परिसर गर्व और आनंद से भर उठा।

कोच चंद्र विजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा —

“यह स्वर्ण पदक केवल एक खिलाड़ी या कोच की नहीं, बल्कि पूरे भारत की जीत है। यह उस विश्वास का प्रतीक है जो राष्ट्र अपने युवाओं में रखता है। मैं यह विजय अपने गुरुजनों, खिलाड़ियों और गोरखपुर की मिट्टी को समर्पित करता हूँ।”

उन्होंने कहा कि दीपक सिंह (दीपू) जैसे युवा देश के खेल आंदोलन की आत्मा हैं — “ऐसे युवाओं में मैं भारत का उज्ज्वल भविष्य देखता हूँ।”

दीपक सिंह (दीपू) ने कहा —

“आज का यह क्षण केवल खेल की जीत नहीं, यह उस विश्वास की विजय है जो गोरखपुर की मिट्टी में रचा-बसा है। चंद्र विजय सिंह ने दिखाया कि जब साधना राष्ट्र को समर्पित हो जाए, तो इतिहास नतमस्तक होता है।”

सर्बिया में हुए मुकाबले में भारतीय पहलवान सुजीत ने 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा, जो कोच चंद्र विजय सिंह के मार्गदर्शन का परिणाम रहा। विशेषज्ञों के अनुसार यह जीत भारतीय कुश्ती के स्वर्ण युग की शुरुआत है।

रेलवे स्टेशन से अंबेडकर चौक तक सड़कों पर स्वागत जुलूस निकाला गया। शहरभर में मिठाइयाँ बाँटी गईं, दीये जलाए गए और युवाओं ने तख्तियाँ थामीं — “दीपू भैया हमारी प्रेरणा, चंद्र विजय सिंह हमारा अभिमान।”

यह उत्सव केवल सम्मान का नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतीक था जो बताती है — जहाँ गोरखपुर की मिट्टी है, वहाँ से ही विश्वविजेता जन्म लेते हैं।