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गोरखपुर के सर्जन ने बढ़ाया शहर का मान : डॉ. शिवशंकर शाही ने कानपुर सम्मेलन में नई सर्जरी तकनीकों पर किया नेतृत्व

प्रकाशित: 08 Nov 2025

गोरखपुर। चिकित्सा जगत में गोरखपुर का गौरव एक बार फिर ऊँचा हुआ है। उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया द्वारा कानपुर में आयोजित कंटिन्यूस मेडिकल एजुकेशन (CME) कार्यशाला में गोरखपुर के प्रख्यात सर्जन और एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया, गोरखपुर सिटी चैप्टर के सचिव डॉ. शिवशंकर शाही ने अपने ज्ञान, अनुभव और नेतृत्व से सबका ध्यान आकर्षित किया।

इस कार्यशाला का उद्देश्य आधुनिक सर्जरी में प्रयुक्त हो रही नई तकनीकों — जैसे लेज़र, रेडियो फ्रीक्वेंसी और स्टेपलर सर्जरी — पर चिकित्सकों को प्रशिक्षित करना और मरीजों को अधिक सुरक्षित, त्वरित व प्रभावी इलाज उपलब्ध कराना था।

डॉ. शिवशंकर शाही ने इस सम्मेलन में पैनल डिस्कशन के चेयरमैन के रूप में नेतृत्व किया। उन्होंने फिशर, फिस्टुला, बवासीर और पाइलोनिडल साइनस जैसी जटिल बीमारियों के आधुनिक उपचारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों के प्रयोग से सर्जरी अब पहले की तुलना में अधिक सटीक, दर्द रहित और शीघ्र रिकवरी वाली हो गई है।

कार्यक्रम में देशभर से आए प्रसिद्ध सर्जनों — मुंबई के डॉ. कुशल मित्तल और दिल्ली के डॉ. प्रवीण भाटिया — ने भी इन तकनीकों के व्यापक प्रयोग पर अपने विचार साझा किए। सभी विशेषज्ञों ने गोरखपुर के सर्जनों की तकनीकी दक्षता और मरीजों के प्रति समर्पण की सराहना की।

इस कार्यशाला में गोरखपुर से डॉ. बी.एन.एस. यादव, डॉ. संदेश श्रीवास्तव, डॉ. योगेश प्रताप, डॉ. अशोक यादव, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. हरिकेश यादव, डॉ. नीरज श्रीवास्तव, डॉ. डी.पी. सिंह, डॉ. बहादुर सिंह और डॉ. ब्रह्मदत्त मल ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया।

डॉ. शिवशंकर शाही ने कहा—

“गोरखपुर अब किसी भी महानगर से पीछे नहीं है। आज जो भी नई सर्जिकल तकनीकें दुनिया में प्रचलित हैं, वे गोरखपुर में भी सफलतापूर्वक अपनाई जा चुकी हैं। शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में आधुनिक विधाओं से सैकड़ों रोगियों का सफल उपचार किया जा रहा है।”

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. संदेश श्रीवास्तव ने कहा—

“गोरखपुर के सर्जन आज मुंबई और दिल्ली के विशेषज्ञों की बराबरी कर रहे हैं। यहाँ हर तरह का उन्नत इलाज उपलब्ध है।”

इस आयोजन ने यह साबित किया कि गोरखपुर की चिकित्सा क्षमता अब राष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान बना रही है, और डॉ. शिवशंकर शाही जैसे समर्पित चिकित्सक इस बदलाव के अग्रदूत हैं।