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महिला अधिकारों की सुरक्षा के लिए विधिक जागरूकता जरूरी

प्रकाशित: 06 Jul 2026

विभव पाठक, ब्यूरो चीफ 

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) में सोमवार को "महिला एवं कानून" विषय पर दो सप्ताहीय बहुविषयक रिफ्रेशर कोर्स का ऑनलाइन शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद् प्रो. एस. पी. एम. त्रिपाठी उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा तथा विधिक जागरूकता एक समतामूलक, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षण संस्थानों का दायित्व केवल विषयगत ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और लैंगिक संवेदनशीलता का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सबसे प्रभावी माध्यम हैं और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें समकालीन सामाजिक एवं कानूनी चुनौतियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. एस. पी. एम. त्रिपाठी ने कहा कि कानून तभी प्रभावी सिद्ध होता है, जब समाज में न्याय, समानता और संवेदनशीलता की भावना विकसित हो। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक चेतना और नैतिक उत्तरदायित्व से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने शिक्षण एवं शोध के माध्यम से विधिक जागरूकता को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने स्वागत भाषण में बताया कि 14 दिवसीय इस रिफ्रेशर कोर्स में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं। प्रतिभागी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, जम्मू, कर्नाटक, गोवा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम महिला अधिकारों, लैंगिक न्याय तथा समकालीन विधिक और सामाजिक चुनौतियों पर गंभीर शैक्षणिक विमर्श का प्रभावी मंच बनेगा।
रिफ्रेशर कोर्स के प्रथम अकादमिक सत्र में विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रो. अहमद नसीम ने "महिला एवं कानून" के संवैधानिक और विधिक आयामों पर विस्तार से व्याख्यान दिया। वहीं दूसरे सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. जयशंकर पांडेय ने महिला सशक्तिकरण के सामाजिक, सांस्कृतिक और समकालीन परिप्रेक्ष्य पर अपने विचार साझा किए। दोनों सत्रों में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विशेषज्ञों से संवाद किया।
कार्यक्रम की रूपरेखा कोर्स समन्वयक डॉ. टी. एन. मिश्र ने प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अभिनव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वंदना सिंह ने किया। उद्घाटन सत्र में देशभर के विभिन्न राज्यों से जुड़े शिक्षकों और प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।