वेतन, ग्रेच्युटी और सेवा सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार-कर्मचारियों की उप श्रमायुक्त से अहम वार्ता
गोरखपुर। राष्ट्रीय सहारा एवं सहारा समय टीवी चैनल से जुड़े पत्रकारों और कर्मचारियों ने गुरुवार को श्रमायुक्त कार्यालय (डीएलसी) पहुंचकर उप श्रमायुक्त शक्ति सेन मौर्य के समक्ष अपनी वर्षों पुरानी समस्याएं विस्तार से रखीं। इस दौरान लोकल प्रबंधन, पत्रकारों-कर्मचारियों और श्रम विभाग के अधिकारियों के बीच शांतिपूर्ण एवं गंभीर वार्ता हुई। बैठक का मुख्य विषय लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि (पीएफ), सेवा शर्तों की स्पष्टता और संस्थान के भविष्य को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता रहा।
पत्रकारों और कर्मचारियों ने उप श्रमायुक्त को अवगत कराया कि बुधवार को लोकल प्रबंधन द्वारा उन्हें मौखिक रूप से यह जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय सहारा आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, जिसके कारण आगे अखबार का मुद्रण कार्य बंद किया जा सकता है। इसके साथ ही कर्मचारियों से यह भी कहा गया कि वे तीन माह का वेतन और एक माह के नोटिस पीरियड की राशि लेकर इस्तीफा सौंप दें। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी सूचना केवल मौखिक थी और इस संबंध में उन्हें किसी प्रकार का कोई लिखित आदेश या आधिकारिक पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया।
कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले 30 से 35 वर्षों से राष्ट्रीय सहारा एवं सहारा समय टीवी चैनल से जुड़े हुए हैं। इतने लंबे समय तक उन्होंने संस्था के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्य किया। सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और अनिश्चित माहौल के बावजूद पत्रकारों और कर्मचारियों ने समाचार संकलन, संपादन, प्रिंटिंग प्रेस और वितरण से जुड़े कार्यों को निरंतर जारी रखा, ताकि समाज तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुंचती रहे।
वार्ता के दौरान यह भी बताया गया कि वर्ष 2013 से अब तक अधिकांश कर्मचारियों को नियमित और पूरा वेतन नहीं मिला है। कई बार पूरे वर्ष में केवल चार या पांच माह का वेतन दिया गया, जबकि कई बार ‘टोकन भुगतान’ के नाम पर आंशिक राशि दी गई। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, कर्मचारियों ने संस्थान के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन जारी रखा।
पत्रकारों और कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अब तक उन्हें ग्रेच्युटी, पीएफ और अन्य वैधानिक लाभों का भुगतान नहीं किया गया है। जिन कर्मचारियों ने अपनी पूरी कार्यशील आयु संस्था को दे दी, वे आज भी अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब वर्षों से बकाया वेतन और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं हुआ, तो केवल तीन माह का वेतन देकर सेवा समाप्त करने की बात कैसे की जा सकती है।
उप श्रमायुक्त शक्ति सेन मौर्य ने वार्ता के दौरान लोकल प्रबंधन से सीधे पूछा कि क्या इस संबंध में प्रबंधन समिति की ओर से कोई लिखित आदेश प्राप्त हुआ है। इस पर लोकल प्रबंधन ने स्वीकार किया कि उनके पास फिलहाल कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं है और कर्मचारियों को दी गई जानकारी केवल मौखिक थी।
इस पर उप श्रमायुक्त ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि श्रम कानून कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए हैं और बिना वैधानिक प्रक्रिया के किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने लोकल प्रबंधन को निर्देश दिया कि कर्मचारियों से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों को लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित निर्णय लिया जा सके।
वार्ता में लगभग 80 से अधिक पत्रकार और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने संयम और एकजुटता के साथ अपनी बात रखी। अंत में उप श्रमायुक्त ने भरोसा दिलाया कि श्रम विभाग पूरे मामले पर गंभीरता से नजर रखेगा और कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि इस हस्तक्षेप से वर्षों से लंबित वेतन और ग्रेच्युटी भुगतान का समाधान निकलेगा और उनके भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।