राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी पर्व: विंध्यवासिनी शाखा में शस्त्र पूजन व पथ संचलन का भव्य आयोजन
गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने संघ साधना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रविवार को विजयादशमी उत्सव के अंतर्गत विंध्यवासिनी नगर शाखा परिसर में शस्त्र पूजन और पथ संचलन का भव्य आयोजन किया। दीनदयाल नगर स्थित सुभाष बस्ती एवं गुरुद्वारा बस्ती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने अनुशासन, संगठन शक्ति और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोरक्ष प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल ने कहा कि “संघ के सौ वर्ष केवल संगठन की यात्रा नहीं, बल्कि यह सेवा, संस्कार और राष्ट्र समर्पण की गाथा है। प्रत्येक स्वयंसेवक का कर्तव्य है कि वह समाज के हर वर्ग तक संगठन का संदेश पहुंचाए।”
नगर संघ चालक प्रो. राजेश सिंह ने विजयादशमी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व शक्ति, संयम और सत्य का प्रतीक है। मुख्य वक्ता विभाग प्रचारक अजय नारायण ने संघ के उद्देश्य और इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि “शताब्दी वर्ष में हमारा संकल्प ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ को साकार करने का होना चाहिए।”
विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के सह मंत्री डॉ. रामनाथ गुप्त ने संघ की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक भूमिका पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एस.के. लोट ने की, जबकि संयोजन की जिम्मेदारी डॉ. अमित सिंह ‘श्रीनेत’ ने निभाई। नगर कार्यवाह राजकुमार ने कार्यक्रम को अत्यंत अनुशासित ढंग से संचालित किया।
शस्त्र पूजन के उपरांत स्वयंसेवकों का अनुशासित पथ संचलन जब नगर मार्गों से निकला तो वातावरण “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के उद्घोषों से गूंज उठा। नागरिकों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर पथ संचलन का स्वागत किया।
इस अवसर पर डॉ. दिलीपमणि त्रिपाठी, डॉ. आर.ए. अग्रवाल, डॉ. आर.पी. शुक्ला, डॉ. शिवशंकर शाही सहित अनेक समाजसेवी, शिक्षाविद् और वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
नेशनल मेडिकल ऑर्गनाइजेशन (NMO) से डॉ. पी.एन. सिंह, डॉ. अमित राय, डॉ. अश्वनी चौधरी सहित सैकड़ों चिकित्सकों ने भी अनुशासित स्वरूप में पथ संचलन में भाग लिया। बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज, एम्स गोरखपुर और मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज से आए 300 से अधिक युवा स्वयंसेवकों ने इस आयोजन में उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का समापन संघ गीत के सामूहिक गायन और राष्ट्र समर्पण के संकल्प के साथ हुआ।