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गोरखपुर: विद्युत निगमों के निजीकरण पर बड़ा विवाद : संघर्ष समिति ने की सीबीआई जांच की मांग

गोरखपुर | 04-Sep-2025 11:11 PM | 47 |
गोरखपुर
संघर्ष समिति ने की सीबीआई जांच की मांग

गोरखपुर। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। समिति ने कहा कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश और उपभोक्ताओं के व्यापक हितों के खिलाफ है, इसलिए इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।

निजीकरण पर उठाए गए पांच सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान संघर्ष समिति ने पांच गंभीर सवाल खड़े किए—

  1. निजी घरानों की भूमिका: नवंबर में लखनऊ में हुई एक बैठक में बड़ी संख्या में निजी कंपनियों ने भाग लिया और कार्यक्रम को स्पॉन्सर किया। इसी बैठक में निजीकरण की रूपरेखा तैयार हुई और पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को डिस्कॉम एसोसिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया।

  2. कंसल्टेंट की नियुक्ति: ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव की अनदेखी की गई। अमेरिका में पेनल्टी झेलने और झूठा शपथ पत्र देने के बावजूद ग्रांट थॉर्टन को हटाया नहीं गया और उसी से निजीकरण का डॉक्यूमेंट तैयार कराया गया।

  3. गुपचुप ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट: बिडिंग हेतु ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार बनाया गया, जबकि यह डॉक्यूमेंट अभी तक सार्वजनिक डोमेन में नहीं है और न ही इस पर आपत्तियाँ आमंत्रित की गईं।

  4. कॉर्पोरेट परामर्श: टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने स्वयं माना कि यूपी में निजीकरण डॉक्यूमेंट कॉर्पोरेट घरानों से चर्चा कर तैयार किए गए हैं।

  5. कौड़ियों के दाम पर बिक्री: निगमों को इक्विटी आधार पर बेचने की तैयारी है, जिससे 42 जिलों की बिजली व्यवस्था कॉर्पोरेट घरानों को बेहद सस्ते दामों पर मिल जाएगी।

सीबीआई जांच और निजीकरण रोकने की मांग

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया करोड़ों रुपए की सरकारी परिसंपत्तियों को हड़पने की साजिश है। समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत तत्काल निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाएं और पूरे मामले की उच्चस्तरीय सीबीआई जांच कराएं।

पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मचारी, किसान, उपभोक्ता, ट्रेड यूनियन और व्हिसल ब्लोअर मिलकर इस तथाकथित घोटाले का पर्दाफाश करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि निजीकरण का विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक प्रदेश सरकार इसे वापस नहीं ले लेती।

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