कानपुर देहात में निजी स्कूलों की मनमानी
कानपुर देहात में निजी विद्यालयों की मनमानी, शीतकालीन अवकाश में भी खुले स्कूल
राजपुर (कानपुर देहात)।
प्रदेश सरकार द्वारा घोषित शीतकालीन अवकाश के बावजूद कानपुर देहात जनपद में कुछ निजी विद्यालय सरकारी दिशा–निर्देशों की खुलेआम अनदेखी करते नजर आ रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा है, जिससे अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त है।
सिकंदरा तहसील क्षेत्र के राजपुर कस्बे में स्थित न्यू लाइट एजुकेशन सेंटर द्वारा शीतकालीन अवकाश के दौरान भी कक्षा 1 से 8 तक नियमित रूप से कक्षाएं संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि यह विद्यालय खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) कार्यालय से मात्र लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद विद्यालय संचालन की जानकारी विभाग को नहीं दी गई।
सरकारी गाइडलाइन के अनुसार अत्यधिक ठंड को देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए विद्यालयों को निर्धारित अवधि तक बंद रखने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन संबंधित विद्यालय प्रबंधन द्वारा इन आदेशों की अनदेखी की जा रही है। स्थानीय अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा की बजाय फीस और उपस्थिति को प्राथमिकता दे रहा है।
मामले को लेकर जब खंड शिक्षा अधिकारी अशोक सिंह से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई भी विद्यालय शासन की मंशा के विपरीत शीतकालीन अवकाश में स्कूल संचालित करता पाया गया, तो उसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी जिले में कुछ निजी विद्यालयों द्वारा नियमों की अवहेलना की शिकायतें मिल चुकी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण ऐसे विद्यालयों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
गुरुवार दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर तहसीलदार राकेश चंद्रा ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया, जहां विद्यालय खुला पाया गया। तहसीलदार ने बताया कि विद्यालय के प्रधानाचार्य से स्पष्टीकरण मांगा गया है और संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय पाल सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें शीतकालीन अवकाश की जानकारी नहीं थी, इसी कारण विद्यालय खोला गया।
👉 अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निलंबन, आर्थिक दंड और सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी स्कूल शासनादेशों का उल्लंघन करने की हिम्मत न कर सके।