करवा चौथ 2025: कौशाम्बी में बाजारों में 'चाँद' की रौनक
कौशाम्बी। अखंड सुहाग की कामना का महापर्व करवा चौथ आज (10 अक्टूबर) कौशाम्बी जनपद में पूरी आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। बाजारों में सुबह से ही सुहागिनों की ऐसी तड़कती-भड़कती भीड़ उमड़ी कि हर गली-मोहल्ला जैसे दुल्हन की तरह सज गया। इस बार व्रत में भक्ति का रंग तो है ही, साथ ही हाईटेक ज़माने का तड़का भी लग गया है!
बाजारों में 'चाँद' की रौनक
मंझनपुर, सिराथू, करारी और चायल के बाजारों में सोलह श्रृंगार के सामानों की बिक्री ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
* करवे की डिमांड: मिट्टी के पारंपरिक करवों से लेकर डिजाइनर स्टील के करवों की दुकानों पर पैर रखने की जगह नहीं थी।
* मेकअप और मेहंदी: सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर महिलाओं की कतारें सुबह से लगी रहीं। सजी-धजी थालियां और चलनी की खरीददारी जोरों पर रही।
* नवविवाहिताओं का उत्साह: जो नई-नई दुल्हनें हैं, उनमें इस पर्व को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखा। वे खास तौर पर डिजाइनर चूड़ियों और लहंगों की खरीदारी में जुटी रहीं।
व्यापारियों के चेहरे पर भी इस बंपर बिक्री की खुशी साफ झलक रही है।
हाईटेक करवा चौथ: वीडियो कॉल से होगा 'चाँद' का दीदार!
कौशाम्बी की कई सुहागिनों ने इस बार व्रत की परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ दिया है। जिनके पति रोजी-रोटी के लिए दिल्ली, मुम्बई या अन्य शहरों में हैं और चाहकर भी घर नहीं आ पाए, वे अब वीडियो कॉल के सहारे अपना व्रत खोलेंगी।
एक सुहागिन महिला ने कहा हमारे प्यार और परंपरा को कम नहीं कर सकती। चांद निकलने पर हम वीडियो कॉल पर ही 'चांद' और अपने पति का चेहरा देखेंगे और व्रत का पारण करेंगे। आजकल का जमाना हाईटेक है, तो करवा चौथ क्यों नहीं!”
जेल में भी आस्था का अनूठा रंग!
इस साल, कौशाम्बी जिला जेल में भी आस्था का एक अनूठा रंग देखने को मिला है। जेल में बंद 5 महिला बंदियों ने भी अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखा है। जेल प्रशासन ने उनके लिए पूजन सामग्री की व्यवस्था कराई है। ये महिलाएं अपने पति की तस्वीर देखकर ही अपना व्रत खोलेंगी।
कुल मिलाकर, कौशाम्बी में करवा चौथ का पर्व पारंपरिक उल्लास के साथ-साथ आधुनिकता का समावेश लिए हुए है, जो इस कौशाम्बीत्योहार को और भी खास और यादगार बना रहा
आज दिनांक 10-10-2025 को जिला कारागार कौशांबी में करवाचौथ के अवसर पर कारागार में निरुद्ध महिला बंदी ने अपने पति की दीर्घायु व सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखा और पूजन किया, जो उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्ष की भावना को प्रदर्शित करता है।