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साहित्यकार लेखक कवि को पेंशन प्रोत्साहन सुविधा सम्मान देने की बात करेगा वह बिहार पर राज करेगा

प्रकाशित: 03 Nov 2025

अलौली/खगडिया बिहार  अखिल भारतीय नवोदित साहित्यसेवी महासंघ के संयोजक किरण देव यादव ने साहित्यसेवी, साहित्यकार, लेखक, कवि, हास्य कवि, श्रृंगार कवि, वीर रस कवि, प्रकृति कवि, अंगिका कवि, मैथिली कवि, भोजपुरी कवि, गवई ठेठ कवि, लोक कवि साहित्यकार लेखक आदि को  सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि एवं पेंशन राशि चालू करने की मांग बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से किया है। 
श्री यादव ने कहा कि जो साहित्यसेवी साहित्यकार लेखक कवि के हित की बात करेगा, वह बिहार में राज करेगा। 
श्री यादव ने कहा कि असम जैसे राज्यों में तथा केंद्र सरकार के द्वारा कुछेक मायने में पेंशन प्रोत्साहन सम्मान साहित्यकारों को दी जाती है किंतु बिहार में नहीं दी जाती है। वहीं दूसरे तरफ प्रगतिशील क्रांतिकारी मुद्दा आधारित लेखक कवि साहित्यकारों पर झूठा मुकदमा कर जेल में बंद कर दिया जाता है।
श्री यादव ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है, लेखन के माध्यम से सड़ी गली व्यवस्था एवं सत्ता पर चोट कर सरकार का ध्यान आकृष्ट करना एवं समाज को जागरूक करना सच्चे साहित्यकार का कर्तव्य एवं अधिकार है। अभिव्यक्ति की आजादी है। किंतु आज सरकार का महिमा मंडन करने वाले, प्रशंसा का कसीदा पढ़ने वाले, अंधविश्वास पर आधारित पाखंडवादी लेखन करने वाले चाटुकार साहित्यकारों को सरकार द्वारा सम्मानित प्रोत्साहित की जाती है जो दुर्भाग्यपूर्ण है जबकि समाज में एक से बढ़कर एक प्रतिभावान नवोदित लेखक कवि साहित्यकार हैं जिन्हें बेहतर मंच, प्रशिक्षक, अवसर नहीं मिलने के कारण प्रतिभा कुंठित हो रही है। उत्कृष्ट लेखन साहित्य के क्षेत्र में युवा लेखक कवि को मंच देने, प्रशिक्षक के उपलब्ध कराने एवं बेहतर अवसर देकर साहित्य को नया आयाम दी जा सकती है।
देश बचाओ अभियान के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष किरण देव यादव ने कहा कि साहित्यिक क्षेत्र में गिरावट हुई है। स्तरीय ह्रास के कारण अश्लीलता चरम पर है। ऐसी स्थिति में साहित्य बचाओ, समाज बचाओ, देश बचाओ नारों को बुलंद करने की जरूरत है। श्री यादव ने उम्दा उल्लेखनीय उत्कृष्ट साहित्यकार को प्रोत्साहित करने, सम्मानित करने, पेंशन चालू करने की मांग किया है। तथा जो सरकार उक्त मांगों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करें उसकी सरकार बनाने की जरूरत है। वैकल्पिक सरकार बनाने की जरूरत है। जो सम्मान सुरक्षा सुविधा पेंशन दे सके।
श्री यादव ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की एक कविता - अंग्रेज राज बड़ी सूखकारी, पर सब धन विदेश चली जाए यही बड़ा दुखकारी, सहित प्रेमचंद जैसे प्रगतिशील लेखक की आज समाज देश में प्रासंगिकता बढ़ गई है। जिनके लेखन में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरा रहता था। किंतु आज देश की सारी संपत्ति दो हाथ में दोनों हाथों से बेची जा रही है, और साहित्यकारों का कलम कुंध है। किंतु आज भी बेबाक तौर पर युवा कवि कुमार विश्वास, डॉ आदित्य जैन,,, अपनी कविता पाठ से देश के आम अवाम को झकझोर रही है जागरुक कर रही है ऐसे साहित्यकारों को सलाम है।
आज भी कुछ ऐसे युवा कवि हैं जो प्रगतिशील लेखन की आत्मा को जीवंत किए हुए हैं आज समाज को ऐसे साहित्यकार की दरकार है। 
श्री यादव ने कहा कि जिले में हिंदी भाषा साहित्य परिषद, अखिल भारतीय अंगिका समाज, साहित्य सृजन मंच, स्वरांजलि, कौशिकी, स्वाधीनता, के माध्यम से साहित्यिक जगत को जीवंतता कायम किए हुए हैं जिसमें स्मृतिशेष कैलाश झा किंकर, नंदकेश निर्मल, अवधेश्वर सिंह, शिवकुमार सुमन, शंकारानंद , चंपा राय, स्वराक्षी स्वरा, सरिता अग्रवाल, संगीता चौरसिया, विक्की, सुधीर यादव, हीरा यादव, नंदकिशोर वियोगी जी, विकास यादव, साधना भगत, कविता परवाना, वासुदेव विधाता, अनिमा कुमारी, चंद्रिका प्रसाद विभाकर, कपिलेश्वर कपिल, सुमन कुमार, सुरेश यादव आदि सहित पड़ोसी जिले से सुधीर प्रोग्रामर, विनोद हसौड़ा, आदि नाम उल्लेखनीय है जो साहित्य का परचम लहरा रहे हैं।
श्री यादव ने कहा कि देश के ज्वलंत मुद्दे बेरोजगारी महंगाई निजीकरण भ्रष्टाचार बलात्कार हत्या अन्याय अत्याचार धार्मिक उन्माद नफरत शिक्षा रोजगार गरीबी पलायन एवं राजनीतिक परिदृश्य को साहित्यिक लेखन के माध्यम से बिहार व देश का दशा एवं दिशा तथा तकदीर एवं तस्वीर बदलने हेतु सत्ता एवं व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में भी साहित्यिक भूमिका निभाने की जरूरत है। तभी सच्चे अर्थों में साहित्य की आत्मा जीवंत होगा।