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अस्पताल पर गंभीर आरोप: मौत के बाद भी वेंटिलेटर पर रखने का शक : जांच में देरी पर उठे सवाल

अलीगढ़ | 09-May-2026 11:30 AM | 521 |
अलीगढ़
जांच में देरी पर उठे सवाल

अलीगढ़ रिपोर्ट
माँ वैष्णो हॉस्पिटल पर एक परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए अत्यधिक चिकित्सा शुल्क वसूली, इलाज में लापरवाही तथा मृत्यु के बाद भी मरीज को वेंटिलेटर पर रखने का शक जताया है। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय द्वारा अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया था, लेकिन अब तक जांच पूरी न होने पर भी सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतकर्ता मोहम्मद सलीम अंसारी निवासी मोहल्ला सुनट, उपरकोट, अलीगढ़ द्वारा मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं जिलाधिकारी को भेजी गई शिकायत में बताया गया कि उनकी माता नजमा बेगम को 23 मार्च 2026 की रात लगभग 9:10 बजे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि 24 मार्च 2026 को सुबह लगभग 4:05 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का कहना है कि मरीज अस्पताल में लगभग सात घंटे ही भर्ती रहीं, लेकिन इस दौरान वेंटिलेटर एवं दवाइयों के नाम पर करीब 34,500 रुपये वसूल लिए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार अस्पताल द्वारा अब तक कोई स्पष्ट एवं मदवार (आइटम-वाइज) बिल उपलब्ध नहीं कराया गया है।
मामले में परिजनों ने एक और गंभीर शक जताया है। उनका आरोप है कि महिला की मृत्यु काफी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन पैसा कमाने के उद्देश्य से उन्हें कई घंटों तक वेंटिलेटर पर रखा गया और उसका अलग से भारी शुल्क लिया गया। परिजनों ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि मरीज की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी, तो फिर बाद में दवाइयों एवं इलाज के नाम पर आखिर किस बात का खर्च लिया गया।
शिकायत पत्र में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 एवं क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच कराने, मदवार बिल उपलब्ध कराने तथा अधिक वसूली सिद्ध होने पर अस्पताल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस कराने की भी मांग उठाई गई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, अलीगढ़ द्वारा अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर 22 अप्रैल 2026 को शाम 4 बजे कार्यालय में उपस्थित होकर सभी अभिलेखों एवं साक्ष्यों सहित अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस में कहा गया था कि निर्धारित समय पर उपस्थित होकर बयान दर्ज कराना सुनिश्चित करें, अन्यथा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वादी पक्ष का कहना है कि उनका बयान 22 अप्रैल 2026 को ही दर्ज कर लिया गया था, लेकिन आज 8 मई 2026 तक न तो जांच की स्थिति स्पष्ट की गई है और न ही कोई सुस्पष्ट कार्रवाई सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जांच में इतनी देरी क्यों हो रही है।
परिजनों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चल रही है, तो अब तक अस्पताल प्रबंधन पर क्या कार्रवाई हुई, जांच किस चरण में है और रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही। वादी पक्ष का आरोप है कि लगातार देरी, अस्पताल पक्ष का उपस्थित न होना तथा बाद में समझौते और दबाव बनाने की कोशिशों ने पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है।
शिकायतकर्ता ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत भी आवेदन देकर मामले की जांच स्थिति, कार्रवाई रिपोर्ट, जांच अधिकारी का नाम, बयान की प्रति, फाइल नोटिंग तथा कथित दबाव बनाए जाने संबंधी जानकारी मांगी है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायत के बाद कुछ लोगों द्वारा समझौते का दबाव बनाने की कोशिश की गई।
वादी पक्ष का कहना है कि उनके पास संबंधित बातचीत की वॉयस रिकॉर्डिंग सहित अन्य साक्ष्य सुरक्षित हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं

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