Fatehpur News : फ़तेहपुर से झकझोर देने वाली तस्वीर
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना ज़ोर-शोर से आगे बढ़ाया जा रहा है। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। फ़तेहपुर ज़िले से एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है जो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
ताज़ा मामला फ़तेहपुर ज़िले के एक ग्रामीण क्षेत्र का है, जहां करंट लगने से एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में परिजन उसे उपचार के लिए लेकर भागे, लेकिन एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में परिजनों ने घायल युवक को चारपाई पर लिटाया और पैदल ही नज़दीकी सरकारी अस्पताल ले गए। वायरल हो रही तस्वीर में देखा जा सकता है कि तीन युवक एक घायल मरीज को चारपाई पर उठाकर अस्पताल परिसर में लेकर आ रहे हैं। अस्पताल के बाहर अन्य मरीज और परिजन इलाज के इंतजार में बैठे नज़र आ रहे हैं।
यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां हाल ही में पेश हुए बजट में स्वास्थ्य विभाग को सबसे बड़ा फंड आवंटित किया गया है। सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड किया जाएगा और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा हर नागरिक तक पहुंचेगी।
लेकिन ज़मीनी स्तर पर सुविधाओं का अभाव और लापरवाह तंत्र कुछ और ही तस्वीर पेश करता है। स्वास्थ्य विभाग की लाख योजनाओं और करोड़ों के बजट के बावजूद न एंबुलेंस समय से पहुंच रही है, न ही ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल उपचार की सुविधा दिखाई दे रही है।
फ़तेहपुर की यह तस्वीर सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की सच्चाई है। जब तक ग्रामीण भारत को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक "ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी" जैसे सपने सिर्फ कागज़ों और घोषणाओं में ही सिमटे रहेंगे।
यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि शासन-प्रशासन को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि बजट और योजनाएं ज़मीन तक कब पहुंचेंगी?
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने में योगदान देते ज़िला #फतेहपुर के लोग…
करंट लगने पर मरीज़ को चारपाई पर लिटा कर अस्पताल लाए, क्योंकि एंबुलेंस समय पर नहीं आई।
बजट में सबसे ज़्यादा पैसा स्वास्थ्य विभाग को गया था… याद है ना? 🤷♂️🩺🚑#UPHealth #GroundReality #Fatehpur pic.twitter.com/UKBIwMYUlJ