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आयुष मिशन ने लगाया स्वास्थ्य परीक्षण शिविर

प्रकाशित: 02 Oct 2025

गोरखपुर। “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” सेवा पखवाड़ा के तहत महानगर गर्ल्स इंटर कॉलेज, राजेंद्र नगर में मंगलवार को राज्य आयुष मिशन उत्तर प्रदेश के निर्देशन में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोरियों के शारीरिक स्वास्थ्य को संवारना, एनीमिया की रोकथाम करना और आयुर्वेद एवं योग के महत्व को व्यवहारिक रूप से समझाना था।

शिविर का संचालन राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय (15 शैय्या) की चिकित्सा टीम ने किया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. दीपक गुप्ता ने विद्यालय परिसर में पहुंचकर छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया और आवश्यकता के अनुसार औषधियाँ व परामर्श उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि कम उम्र में रक्ताल्पता (एनीमिया) एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है, जिसका समाधान संतुलित आहार, उचित दिनचर्या और जागरूकता से ही संभव है।

डॉ. गुप्ता ने बालिकाओं को बताया कि मौसमानुसार जीवन शैली (ऋतुचर्या), प्रातःकालीन नियम (दिनचर्या) और पौष्टिक भोजन शरीर की मूल प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने लौह-युक्त आहार, हरी सब्जियां, मौसमी फल और पर्याप्त पानी के सेवन की सलाह देते हुए कहा कि नियमित नींद और समय पर भोजन से किशोरावस्था की कई समस्याओं से बचाव संभव है।

कार्यक्रम में अभिषेक मिश्रा ने योग की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए कहा कि किशोरियों के लिए नियमित योगाभ्यास तनाव नियंत्रण, पाचन सुधार, हार्मोन संतुलन और शारीरिक लचीलापन बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने छात्राओं को सरल आसनों और प्राणायाम की उपयोगी तकनीकें बताईं।

विद्यालय के व्यवस्थापक राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बालिकाओं को भारतीय आयुर्वेद की परंपरा और उसकी वैज्ञानिकता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता से छात्राएं भविष्य में स्वयं के साथ परिवार और समाज के स्वास्थ्य की संवाहक बन सकती हैं।

शिविर में कुल 50 बालिकाओं ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया और आयुर्वेदिक परामर्श लिया। अधिकांश छात्राओं ने एनीमिया, आहार, स्वच्छता, ऋतुचर्या और योग से संबंधित प्रश्न पूछकर अपनी शंकाएं दूर कीं।

कार्यक्रम के आयोजन में रेवती रमन त्रिपाठी, सुरेश, विवेक और काशीनाथ का विशेष सहयोग रहा। विद्यालय प्रबंधन ने राज्य आयुष मिशन और आयुर्वेदिक अस्पताल की टीम के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ऐसे शिविरों से बालिकाओं में स्वास्थ्य चेतना और आत्मविश्वास दोनों का विस्तार होता है।