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डॉ. शिव शंकर शाही बने उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के कार्यकारिणी सदस्य : पूर्वांचल को मिला गौरव, गोरखपुर के चिकित्सक ने जीता प्रदेशभर में भारी मतों से चुनाव

गोरखपुर | 13-Oct-2025 08:42 PM | 47 |
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पूर्वांचल को मिला गौरव, गोरखपुर के चिकित्सक ने जीता प्रदेशभर में भारी मतों से चुनाव

गोरखपुर। चिकित्सा जगत में अपने ज्ञान, सेवा और संवेदना से नई ऊर्जा का संचार करने वाले विख्यात सर्जन डॉ. शिव शंकर शाही को उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया (ASI-UP) की कार्यकारिणी परिषद का सदस्य चुना गया है। यह उपलब्धि न केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि पूरे पूर्वांचल के लिए गर्व का क्षण है।

इस प्रतिष्ठित चुनाव में 27 सितंबर से 11 अक्टूबर तक ई-वोटिंग संपन्न हुई, जिसमें प्रदेशभर के सर्जनों ने भाग लिया। कुल 18 प्रत्याशियों में से 11 का चयन होना था। नतीजों की घोषणा ऑनलाइन मीटिंग के माध्यम से हुई, जिसमें डॉ. शाही ने पूर्वांचल से सर्वाधिक मत प्राप्त कर विजय हासिल की।

शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, गोरखपुर के निदेशक और लेप्रोस्कोपिक, लेज़र एवं रोबोटिक सर्जरी विशेषज्ञ के रूप में जाने जाने वाले डॉ. शाही ने पूर्वांचल में आधुनिकतम सर्जिकल तकनीकों को स्थापित कर यह सिद्ध किया है कि बड़े शहरों की चिकित्सा अब छोटे नगरों तक पहुँच सकती है, यदि इच्छाशक्ति सशक्त हो।

डॉ. शाही वर्तमान में एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया (गोरखपुर शाखा) के सचिव हैं। इससे पूर्व वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) गोरखपुर एवं उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष, तथा हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया (UP) के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी नेतृत्वशैली में वैज्ञानिक दृष्टि, मानवीय संवेदना और संगठनात्मक अनुशासन का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

ASI का उद्देश्य केवल सर्जरी का विकास नहीं, बल्कि चिकित्सा में मानवता की स्थापना है। यह संस्था निरंतर CME और Skill Enhancement Programs के माध्यम से चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों—जैसे रोबोटिक सर्जरी, रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन और लेज़र विधियों में प्रशिक्षित करती है। कार्यकारिणी सदस्य के रूप में डॉ. शाही अब इन तकनीकों को उत्तर प्रदेश के दूरस्थ जनपदों तक पहुँचाने का कार्य करेंगे, जिससे गरीब और ग्रामीण मरीजों को भी विश्वस्तरीय सर्जरी सुविधा मिल सके।

मानवता की सेवा में भी डॉ. शाही सदैव अग्रणी रहे हैं। उनके नेतृत्व में महाकुंभ में कंबल वितरण, नेत्र कुम्भ में शिविर, वृद्धाश्रमों व दिव्यांग स्कूलों में चिकित्सा सेवा तथा बाढ़-हीट स्ट्रोक राहत कार्य किए गए।

उनका मानना है कि —

“सर्जरी केवल शरीर की मरम्मत नहीं, आत्मा को राहत देने की प्रक्रिया है।”

उनकी यह उपलब्धि पूर्वांचल के चिकित्सा इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने योग्य है।

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