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फ़िराक़ की जयंती पर शेरो-शायरी की महफ़िल, ग़ज़लों की गूंज से दी श्रद्धांजलि : फ़िराक़ लिटरेरी फ़ाउंडेशन ने आयोजित की काव्य गोष्ठी, देर रात तक वाह-वाह और दाद की गूंज

गोरखपुर | 29-Aug-2025 12:52 PM | 47 |
गोरखपुर
फ़िराक़ लिटरेरी फ़ाउंडेशन ने आयोजित की काव्य गोष्ठी, देर रात तक वाह-वाह और दाद की गूंज

गोरखपुर, 28 अगस्त।
उर्दू साहित्य के अमर कवि, ज्ञानपीठ पुरस्कार से अलंकृत और ग़ज़लों के सम्राट कहे जाने वाले रघुपत सहाय ‘फ़िराक़ गोरखपुरी’ की जयंती पर गुरुवार को शहर शेरो-शायरी की रूहानी फिज़ाओं में डूब गया।

फ़िराक़ लिटरेरी फ़ाउंडेशन, गोरखपुर द्वारा अध्यक्ष अरशद जमाल समानी के आवास पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शायर और काव्य संपादक डॉ. कलीम कैसर ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रहमत अली और इंजीनियर तनवीर सलीम मौजूद रहे।

कार्यक्रम में शहर व बाहर से आए साहित्य प्रेमियों ने शेर-ओ-शायरी के माध्यम से फ़िराक़ साहब को श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि डॉ. रहमत अली ने कहा कि अलीगढ़ में जब भी फ़िराक़ साहब मुशायरे में आते थे, छात्रों का उत्साह देखने लायक होता था। उनकी आवाज़ और लहजा आज भी कानों में गूंजता है।
वहीं इंजीनियर तनवीर सलीम ने याद किया कि लखनऊ के मुशायरों में युवावस्था में पहली बार फ़िराक़ साहब को मंच पर सुना था। उन्होंने गर्व जताया कि वे उसी गोरखपुर के वासी हैं जिसका नाम फ़िराक़ गोरखपुरी से दुनिया भर में रोशन है।

फ़ाउंडेशन अध्यक्ष अरशद जमाल समानी ने कहा कि फ़िराक़ गोरखपुरी गोरखपुर की मिट्टी से गहरे जुड़े थे। इसलिए यह गोरखपुरवासियों का दायित्व है कि उनकी स्मृति को जीवंत रखें और नई पीढ़ी तक उनका साहित्य पहुँचाएँ।

शाम ढलते ही जब ग़ज़लें, नज़्में और अशआर पेश हुए तो देर रात तक महफ़िल वाह-वाह और दाद की गूंज से गूंजती रही। आयोजन ने यह साबित किया कि गोरखपुर की सांस्कृतिक विरासत में शायरी की वही चमक आज भी बरकरार है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
 

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