ब्रिटिश भी नहीं कर पाए थे गोरखा सैनिकों का सामना, संधि के लिए होना पड़ा था मजबूर: सीएम योगी
गोरखपुर, 04 सितंबर।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखा सैनिकों की शौर्यगाथा को प्रेरणास्रोत बताते हुए गोरखा युद्ध स्मारक के सौंदर्यीकरण और संग्रहालय निर्माण का शिलान्यास किया। लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना न केवल गोरखा सैनिकों की वीरता का सम्मान करेगी बल्कि भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती देगी। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान भी मौजूद रहे।
योगी ने कहा कि 1816 के ब्रिटिश-गोरखा युद्ध में ब्रिटिश सेना को गोरखा सैनिकों के सामने झुकना पड़ा और उन्हें संधि के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि ‘जय महाकाली, जय गोरखाली’ के उद्घोष के साथ जब गोरखा सैनिक दुश्मन पर टूट पड़ते हैं, तो शत्रु पीछे हट जाता है। मुख्यमंत्री ने गोरखा सैनिकों की वीरता को स्वतंत्र भारत और उससे पहले की गौरवशाली विरासत बताते हुए शहीद सैनिकों की वीर नारियों को सम्मानित किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमिपूजन
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमिपूजन से हुई। सीएम ने मां काली मंदिर में पूजा-अर्चना की और गोरखा रिक्रूटिंग डिपो पर बनी लघु फिल्म देखी। जवानों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य और गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अग्निवीरों को 20% आरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि नया संग्रहालय युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। इसमें गोरखा रेजीमेंट की पुरानी वर्दियां, हथियार और युद्धकला प्रदर्शित की जाएंगी। उन्होंने घोषणा दोहराई कि अग्निवीर योजना के तहत लौटने वाले जवानों को यूपी पुलिस में 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।
सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने स्मारक के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक बनेगा। उन्होंने गोरखा सैनिकों की वीरता और भारत-नेपाल संबंधों में उनकी भूमिका को याद किया।
नया संग्रहालय डिजिटल और साउंड-एंड-लाइट शो, 7डी थिएटर और म्यूरल पेंटिंग के जरिए गोरखा सैनिकों की शौर्यगाथा को जीवंत करेगा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान, सांसद रविकिशन, गोरखा ब्रिगेड के प्रमुख ले. जनरल संजीव सिंह चौहान, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव सहित कई जनप्रतिनिधि और सेना अधिकारी मौजूद रहे।