पशु तस्करों के खिलाफ एडीजी जोन ने चलाया ऑपरेशन क्लीन स्वीप, 33 पुलिसकर्मी लाइनहाजिर
गोरखपुर। गोरखपुर और आसपास के जिलों में बढ़ती पशु तस्करी और हाल ही में पिपराइच क्षेत्र में युवक की हत्या के बाद पुलिस प्रशासन पर सवाल उठने लगे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर सख्त नाराजगी जताते हुए तस्करों और उनकी मदद करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसी क्रम में एडीजी जोन मुथा अशोक जैन ने पूरे जोन में “ऑपरेशन क्लीन स्वीप” अभियान शुरू कर दिया है।
पिपराइच की घटना बनी ट्रिगर
15 सितंबर की रात पिपराइच के जंगल धूषण टोला महुआचाफी गांव में पशु तस्कर चोरी की नियत से घुसे। ग्रामीणों ने शोर मचाया तो वे भागने लगे। इस दौरान 19 वर्षीय दीपक गुप्ता ने उनका पीछा किया तो तस्करों ने उसका अपहरण कर हत्या कर दी। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने एक तस्कर को पकड़कर उसकी पिकअप गाड़ी में आग लगा दी और अगले दिन सुबह गोरखपुर-पिपराइच मार्ग जाम कर दिया। अधिकारियों के आश्वासन पर जाम खत्म हुआ, लेकिन यह मामला शासन स्तर तक पहुंचा और मुख्यमंत्री ने कठोर कार्रवाई का आदेश दिया।
पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज
पशु तस्करों पर सख्त कार्रवाई न करने और मिलीभगत की शिकायतों के चलते कुशीनगर और देवरिया के एसपी को हटा दिया गया। वहीं एसएसपी गोरखपुर राजकरन नैय्यर ने जंगल धूषण चौकी इंचार्ज समेत कई पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि पशु तस्करों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है।
ऑपरेशन क्लीन स्वीप
एडीजी जोन अशोक जैन ने कहा कि पूरे 11 जिलों में तस्करों के खिलाफ अभियान चल रहा है। इसमें गिरफ्तार, फरार और जमानत पर चल रहे आरोपियों की कुंडली तैयार की जा रही है। खास तौर पर ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं जो तस्करों की मदद करते हैं।
उन्होंने बताया कि कुशीनगर जिले के 33 पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर किया गया है। वहीं, पशु तस्करों की तलाश में बिहार गई पुलिस टीम की तस्करों से भिड़ंत हुई थी, लेकिन सभी जवान सकुशल वापस लौट आए।
अब तक की कार्रवाई
16 सितंबर से शुरू हुए इस पांच दिवसीय अभियान में अब तक 30 पशु तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। पुलिस ने इस दौरान 6 वाहन, 6 पशु और 26 अवैध सामग्रियां बरामद की हैं। इसके साथ ही गौ-तस्करी में संलिप्त 215 अभियुक्तों के विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है।
एडीजी जोन का कहना है कि ऑपरेशन का मकसद न केवल तस्करों को पकड़ना है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। साथ ही उन पुलिसकर्मियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा जो किसी भी स्तर पर तस्करों की मदद कर रहे हैं।