पीजीआई लखनऊ में नसों की बीमारी कार्यशाला: डॉ. शिव शंकर शाही ने बताई वैश्विक तकनीकें
लखनऊ/गोरखपुर। पीजीआई लखनऊ में आयोजित नसों की बीमारी पर कार्यशाला में उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ़ सर्जन ऑफ़ इंडिया की ओर से गोरखपुर के सुप्रसिद्ध सर्जन डॉ. शिव शंकर शाही मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों को खून पतला करने वाली दवाओं के साथ ऑपरेशन की जटिलताओं और नई तकनीकों से अवगत कराना था।
डॉ. शाही ने बताया कि कई मरीजों में आर्टिफिशियल हार्ट वाल्व या एनजीओप्लास्टी स्टैंड होता है और उन्हें खून पतला करने वाली दवा चलानी पड़ती है। इस दवा को रोकने पर खून का थक्का बन सकता है और जारी रखने पर ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा रहता है। उन्होंने इसे “दो धारी तलवार” बताया। डॉ. शाही ने उच्च तकनीक और विशेष दवाओं के इस्तेमाल से ऐसे मरीजों का सुरक्षित और सफल ऑपरेशन करने की प्रक्रिया विस्तार से साझा की, जिसे वैश्विक स्तर पर भी अपनाया जाता है।
कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हुए, जिनमें मुंबई, कोलकाता, मद्रास, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, केरल और तमिलनाडु के चिकित्सक शामिल थे। सभी ने नई तकनीकों जैसे लेजर सर्जरी, रेडियो फ्रीक्वेंसी अवलेजन और इंडोवैस्कुलर तकनीक पर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। डॉ. शाही ने बताया कि ये तकनीकें पहले से ही शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, गोरखपुर में सफलतापूर्वक अपनाई जा रही हैं।
कार्यशाला में खून के थक्के निकालने, नसों का अल्ट्रासाउंड करने, पैरों में फूलती नसों का लेजर उपचार और लंबे समय तक घाव वाले मरीजों के इलाज जैसी नई विधियों पर चर्चा हुई।
मुख्य आयोजक डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने डॉ. शाही से अनुरोध किया कि गोरखपुर में भी ऐसी कार्यशालाएँ आयोजित की जाएं, ताकि दूरदराज और छोटे कस्बों के चिकित्सक भी इन तकनीकों से लाभान्वित हो सकें। डॉ. शाही ने वादा किया कि जल्द ही गोरखपुर में इस तरह की कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भारत के चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना और उन्हें अपने मरीजों तक सुरक्षित और प्रभावी उपचार पहुँचाने में सक्षम बनाना था।