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गोरखपुर की कौशल्या देवी से पीएम मोदी ने किया संवाद, सीएम योगी के विजन से बनीं लखपति दीदी

प्रकाशित: 27 Sep 2025

गोरखपुर, 25 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ने गोरखपुर की महिला पशुपालक कौशल्या देवी की किस्मत ही बदल दी। महज डेढ़ साल पहले तक सीमित संसाधनों के साथ गुजर-बसर कर रहीं कौशल्या देवी आज देशभर में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। गुरुवार को ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का अवसर मिला। पीएम ने उनसे सहज संवाद किया और उनकी सफलता की दास्तां सुनकर शाबासी दी।

कौशल्या देवी गोरखपुर जिले के चौरीचौरा तहसील क्षेत्र की रहने वाली हैं। वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से गठित श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एमपीओ) की शेयरहोल्डर हैं। इस संस्था से जुड़कर उन्होंने डेढ़ साल में करीब 14 लाख रुपये की आमदनी अर्जित की है। पहले उनके पास केवल दो पशु थे, जो अब बढ़कर 14 हो गए हैं।

कौशल्या ने पीएम मोदी को बताया कि संस्था से जुड़ने के बाद न केवल उनकी आमदनी बढ़ी, बल्कि उन्हें गोबर गैस यूनिट जैसी सुविधा भी मिली। इससे अब उनके घर में खाना बनाने के लिए सिलिंडर की ज़रूरत नहीं पड़ती। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण की सशक्त कहानी बताया।

इससे पहले जुलाई माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में कौशल्या देवी की सराहना की थी। अब प्रधानमंत्री से संवाद ने उनकी सफलता को और अधिक पहचान दिला दी है।

श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीओ की सफलता का आलम यह है कि केवल डेढ़ साल की अवधि में गोरखपुर मंडल की 31 हजार महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं। इसका टर्नओवर 115 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। संस्था की 1841 महिलाएं अब तक लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाएं प्रतिदिन औसतन 65 हजार लीटर दूध संग्रहित कर रही हैं, जिसकी आपूर्ति मदर डेयरी को की जाती है।

संस्था की ओर से महिलाओं को पशु आहार, खनिज मिश्रण, थनैला रोग जांच, कृत्रिम गर्भाधान जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इस पहल से गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया और कुशीनगर जिलों की हजारों महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

कौशल्या देवी की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर गांव की महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की बड़ी मिसाल बन सकती हैं।