श्रीमद्भागवत कथा का मर्म है सनातन धर्म के प्रति समर्पण : सीएम योगी
गोरखपुर, 10 सितंबर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर परिस्थिति में सनातन धर्म के प्रति समर्पण का भाव बना रहे, यही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का वास्तविक मर्म है। यह कथा जीवन में ज्ञान का भान कराने वाली, भक्ति से जोड़ने वाली और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली है।
सीएम योगी बुधवार शाम गोरखनाथ मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र पर बोल रहे थे। यह आयोजन युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में हुआ।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का पहला श्रवण 5 हजार वर्ष पूर्व स्वामी शुकदेव जी ने महाराजा परीक्षित को कराया था। तब से यह सनातन धर्मावलंबियों की मुक्ति का माध्यम बन रही है। भारत की ऋषि परंपरा ने दुनिया को ज्ञान, भक्ति और मुक्ति का यह अनुपम उपहार दिया है। कथा का सार यही है कि हम हर परिस्थिति में धर्म और राष्ट्र के प्रति अडिग, अटल और समर्पित रहें।
कथा व्यास जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज (परिधान पीठ, गोपाल मंदिर, श्रीअयोध्याधाम) की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अत्यंत सरलता और सहजता से कथा का अमृतपान कराया। सीएम ने घोषणा की कि अगले वर्ष उनके श्रीमुख से श्रीरामकथा का श्रवण भी कराया जाएगा।
कथा के विराम अवसर पर मुख्यमंत्री, संतजनों और यजमानों ने व्यासपीठ की आरती उतारी। कार्यक्रम में महंत बालकनाथ (मस्तनाथ पीठ, हरियाणा), महंत शेरनाथ (जूनागढ़), प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा (काशी), स्वामी विद्या चैतन्य (नैमिषारण्य), महंत राजूदास (हनुमानगढ़ी, अयोध्या) सहित अनेक संतजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे।