थनावाद में आयुर्वेद चिकित्सा शिविर
थनावाद में आयुर्वेद चिकित्सा परामर्श शिविर आयोजित, 215 रोगी हुए लाभान्वित
झालावाड़।
आरोग्य भारती चित्तौड़ प्रांत, जिला झालावाड़ के तत्वावधान में दिनांक 23-12-2025 को ग्राम पंचायत थनावाद में आयुर्वेद चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में आयुर्वेद की विशिष्ट चिकित्सा पद्धतियों अग्निकर्म एवं ऑस्टियोपैथी के माध्यम से रोगियों को लाभान्वित किया गया।
आरोग्य भारती झालावाड़ के सचिव डॉ. नवल किशोर टेलर ने बताया कि शिविर में ग्राम थनावाद के कुल 215 रोगियों को परामर्श दिया गया, जिनमें से चिन्हित रोगियों को ऑस्टियोपैथी एवं अग्निकर्म उपचार प्रदान किया गया। शिविर में कमर, गर्दन, कंधे का दर्द, स्लिप डिस्क, सायटिका, माइग्रेन, सिरदर्द, जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, पाचन संबंधी समस्याएँ (गैस, IBS, कब्ज) एवं सांस की दिक्कत से संबंधित रोगों का उपचार किया गया।
डॉ. संदीप निर्मल ने बताया कि ऑस्टियोपैथी चिकित्सा पद्धति में हड्डियों, मांसपेशियों, नसों तथा रक्त व लसिका संचार में उत्पन्न असंतुलन व जकड़न को दूर किया जाता है। यह शरीर की संरचना को सही कर हड्डियों और जोड़ों की गलत स्थिति सुधारती है, मांसपेशियों की जकड़न खोलती है, रक्त व नर्व फ्लो को बेहतर बनाती है, नसों पर दबाव कम करती है तथा सूजन व दर्द में कमी लाती है। इससे शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता सक्रिय होती है और दवाओं पर निर्भरता कम होती है।
डॉ. प्रियांशु पारेता ने बताया कि अग्निकर्म आयुर्वेद की एक प्रभावी पेन मैनेजमेंट थेरेपी है, जिससे रोगी को त्वरित लाभ प्राप्त होता है। आयुर्वेद अनुसार वातजन्य रोगों में अग्निकर्म सर्वोत्तम चिकित्सा मानी गई है। यह वात एवं कफ दोष का शमन कर तीव्र एवं पुराने दर्द को समाप्त करती है, जिससे रोगों की पुनरावृत्ति की संभावना कम होती है।
हिंदू जागरण मंच झालावाड़ के जिला सह-संयोजक एवं थनावाद निवासी पानाचंद मीणा ने बताया कि इस आयुर्वेद चिकित्सा शिविर के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला, क्योंकि अनेक रोगियों को दर्द व अन्य बीमारियों में त्वरित राहत मिली। शिविर के आयोजन में रामबाबू मीणा एवं रवि रेगर का विशेष सहयोग रहा।