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दानेदार डीएपी का विकल्प है नैनो डीएपी

प्रकाशित: 14 Sep 2025

शाहजहाँपुर। सेरामऊ साधन सहकारी समिति पर शुक्रवार को इफको द्वारा नैनो उर्वरक जागरूकता अभियान के तहत किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के सभापति सुनील कुमार सिंह ने की। गोष्ठी में क्षेत्र अधिकारी इफको शाहजहाँपुर रामरतन सिंह ने किसानों को नैनो डीएपी के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक दानेदार डीएपी के स्थान पर किसान नैनो डीएपी का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि गेहूं की बुवाई के समय दानेदार डीएपी की मात्रा को 50 प्रतिशत कम कर एकड़ बीज को 500 एमएल नैनो डीएपी से उपचारित करें। इसके अलावा जब फसल 30-35 दिन की हो जाए तो एक बोतल नैनो डीएपी का छिड़काव करने से उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। आलू की फसल के बारे में उन्होंने कहा कि बीज पर 10 एमएल नैनो डीएपी को एक लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करने से जमाव अच्छा होता है, किल्ले अधिक निकलते हैं और उत्पादन बढ़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे केवल दानेदार डीएपी पर निर्भर न रहें, क्योंकि यह जमीन की उर्वरा शक्ति को कमजोर करती है। वहीं, केमिकल खाद से पैदा होने वाली फसल स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। नैनो डीएपी पूर्णत: जैविक है और इससे पैदावार भी बेहतर होती है। कार्यक्रम में भावेश त्रिपाठी (टीएमई, इफको-एमसी) ने फसलों में लगने वाले रोग व कीटों की जानकारी दी, जबकि सचेंद्र वर्मा (एमडीई, एक्वा एग्री) ने किसानों को जैव उर्वरकों के लाभ और प्रयोग विधि के बारे में विस्तार से बताया। गोष्ठी में बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे और नैनो डीएपी को अपनाने का संकल्प लिया।