दबंग ब्याजियों के आतंक से दलित परिवार गांव छोड़कर भागा
शाहजहांपुर। जनपद में अवैध ब्याजखोरी का जाल दिनों-दिन मजबूत होता जा रहा है। मनमाने ढंग से 10 से 20 प्रतिशत तक ब्याज वसूलने वाले सूदखोरों के बढ़ते अत्याचार के चलते कई परिवार आर्थिक, सामाजिक और मानसिक शोषण का शिकार हैं। आरोप है कि इन सूदखोरों की राजनीतिक पहुंच और स्थानीय पुलिस से सांठगांठ के कारण पीड़ितों की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। कटरा थाना क्षेत्र में भी एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने के दावे सामने आए हैं, जो महिला-पुरुष एजेंटों के माध्यम से गांवों में जरूरतमंदों को कर्ज देकर बाद में कई गुना ब्याज वसूलता है।
दलित परिवार पर अत्याचार, महिला व बच्चों को गांव छोड़ना पड़ा
ग्राम रायपुर निवासी दलित युवक उमेश पुत्र रामनाथ ने बताया कि उसने गांव की महिला वीरावती से 30 हजार रुपये 2% ब्याज पर उधार लिए थे। आरोप है कि रकम लौटाने पहुंचने पर वीरावती ने अचानक 20% ब्याज की मांग कर विवाद खड़ा कर दिया। विरोध करने पर महिला के बड़े बेटे ने उमेश के साथ मारपीट की और दबाव बनाकर स्टांप पर अधिक रकम लिखवा ली। उमेश का कहना है कि इसके बाद विरावती उसके घर पहुंची और उसकी पत्नी रेखा को गाली-गलौज कर थप्पड़ मारा तथा जमीन कब्जाने की धमकी दी। उत्पीड़न से परेशान होकर रेखा बच्चों को लेकर गांव छोड़ गई। पुलिस से बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उमेश भी गांव छोड़ने पर मजबूर हो गया।
अन्य ग्रामीण ने भी लगाया शोषण का आरोप
गांव के रफीक अहमद ने बताया कि उसने कटरा क्षेत्र के एक सूदखोर से 1 लाख रुपये उधार लिए थे। वह चार वर्षों में ब्याज के रूप में डेढ़ लाख रुपये से अधिक चुका चुका है, फिर भी उससे मूलधन की पूरी राशि की वसूली की जा रही है। शिकायत के बाद पुलिस ने जवाब दिया— “जो लिया है, वह देना होगा।”
पुलिस ने मामले को ‘लेन-देन’ बताकर हटाए हाथ
कटरा थाना प्रभारी निरीक्षक जुगल किशोर पाल ने कहा कि यह “लेन-देन का मामला है, जिसमें पुलिस हस्तक्षेप नहीं कर सकती।”