शाहजहांपुर में शिक्षकों का वेतन रोकने के आदेश पर बवाल
शाहजहांपुर। जनपद के 2138 परिषदीय विद्यालयों के समस्त स्टाफ का सितम्बर माह का वेतन रोकने के आदेश ने शिक्षकों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस आदेश को शासन एवं विभागीय निर्देशों की अवहेलना बताते हुए इसे शिक्षक उत्पीड़नात्मक करार दिया है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों का वेतन रोका गया तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
इस संदर्भ में जिला अध्यक्ष मुनीश मिश्र के नेतृत्व में शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने बुनियादी शिक्षा अधिकारी (बीएसए) दिव्या गुप्ता से भेंट कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। प्रतिनिधियों का कहना था कि यू-डाइस पोर्टल के डाटा बॉक्स में कुछ ऐसे बच्चों के नाम दर्ज हैं जिनका वास्तव में किसी विद्यालय में दाखिला नहीं हुआ है। इस त्रुटि के कारण पूरे विद्यालय स्टाफ का वेतन रोकना न केवल अनुचित है बल्कि विभागीय आदेशों की भी अवहेलना है।
बीएसए दिव्या गुप्ता ने प्रतिनिधिमंडल से वार्ता कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षक ऐसे बच्चों के अभिभावकों से संपर्क स्थापित करें और वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाएं। यदि बच्चों का अभी तक दाखिला नहीं हुआ है तो उन्हें विद्यालय में प्रवेश के लिए प्रेरित किया जाए। वहीं जिन बच्चों का अन्य विद्यालयों में दाखिला हो चुका है, वहां से भी सही जानकारी प्राप्त कर तत्काल संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध कराई जाए।
बीएसए ने आश्वस्त किया कि शिक्षकों का वेतन रोका नहीं जाएगा, लेकिन सभी विद्यालयों के लिए यह अनिवार्य है कि डाटा बॉक्स में प्रदर्शित बच्चों की सटीक जानकारी दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि प्रदेश स्तर पर जिले की रैंकिंग प्रभावित न हो।
प्रतिनिधिमंडल में जिला मंत्री देवेश बाजपेई, जिला कोषाध्यक्ष रविन्द्र पाल प्रजापति, मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी, उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह सहित कई पदाधिकारी शामिल रहे। उन्होंने एक स्वर में कहा कि संगठन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और यदि विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया तो आंदोलनात्मक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले के शिक्षकों के बीच चिंता और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग आगे इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और क्या शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है या नहीं।