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अंगदान व देहदान की मिसाल बने शिक्षक दंपति और युवा शिक्षक

प्रकाशित: 02 Apr 2026

समाज में मानवता और सेवा का संदेश देने वाले उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन कुछ लोग अपने कार्यों से दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसे ही प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं झांसी के मूल निवासी लोकेंद्र प्रताप सिंह, जो जनपद सिद्धार्थनगर के खरदेवरी विद्यालय, ब्लॉक खुनियांव में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्नी डॉ पिंकी सिंह, झांसी के डॉ राम मनोहर पीजी कॉलेज, गुलसराय में प्राचार्य हैं।

दोनों दंपति ने अंगदान का संकल्प लेकर समाज के सामने एक मिसाल पेश की है। National Organ and Tissue Transplant Organization (NOTTO) के माध्यम से जारी प्रमाणपत्र के अनुसार, उन्होंने अपने लिवर, हार्ट, किडनी, फेफड़े सहित अन्य अंगों और कॉर्निया को दान करने की स्वीकृति दी है। उनका यह निर्णय न केवल जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायी साबित होगा, बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ाएगा।

इसी क्रम में गाजियाबाद के मूल निवासी राहुल कुमार भी एक अनूठी मिसाल हैं। वर्तमान में वे प्राथमिक विद्यालय दुबाई, ब्लॉक खेसरहा, जनपद सिद्धार्थनगर में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। राहुल कुमार ने वर्ष 2010 में ही देहदान का संकल्प लिया था और उस समय वे प्रदेश के सबसे युवा देहदानवीर के रूप में पहचाने गए थे।

अंगदान और देहदान को लेकर समाज में अभी भी कई भ्रांतियां मौजूद हैं, लेकिन ऐसे प्रेरणादायक कदम इन धारणाओं को तोड़ने का कार्य करते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि एक व्यक्ति के अंगदान से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है, जबकि देहदान चिकित्सा शिक्षा और शोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इन शिक्षकों की यह पहल न केवल मानवता के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।