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Rajasthan

प्रकाशित: 19 Dec 2025

सिरोही | पिंडवाड़ा–स्वरूपगंज 

कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना के विरोध में सर्व समाज का ऐलान

एक माह का अल्टीमेटम,निरस्तीकरण नहीं हुआ तो 28 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन आंदोलन

सिरोही जिले के पिंडवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की खनन परियोजना के खिलाफ सर्व समाज खुलकर मैदान में उतर आया है। रविवार को स्वरूपगंज कस्बे की देवासी समाज धर्मशाला में 36 कौमों की विशेष महापंचायत आयोजित हुई, जिसमें सरकार को एक माह का स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई कि यदि परियोजना निरस्त नहीं की गई तो 28 जनवरी 2026 से बड़े स्तर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

रैली निकालकर जताया आक्रोश

महापंचायत से पूर्व बजरंग चौराहे पर राष्ट्रीय पशुपालन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह रायका का देवासी समाज व सर्व समाज की ओर से फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद कस्बे में विशाल रैली निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। रैली के दौरान सरकार से करीब 800 हेक्टेयर (लगभग 3200 बीघा) भूमि पर प्रस्तावित खनन परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई।

खनन से क्षेत्र को गंभीर नुकसान का दावा

वक्ताओं ने कहा कि यह परियोजना चारागाह भूमि के समाप्त होने, पशुपालकों की आजीविका पर संकट, किसानों की कृषि भूमि के बंजर होने और पर्यावरण प्रदूषण से गंभीर बीमारियों का कारण बनेगी। अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए एकजुट संघर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

समाजसेवियों का समर्थन

समाजसेवी भरत सराधना ने कहा कि परियोजना निरस्तीकरण तक हर संभव सहयोग दिया जाएगा। राकेश रावल ने देवासी समाज की ओर से आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया। भीखु सिंह देवासी ने आमजन से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की।

28 जनवरी से एनएच-27 के पास आंदोलन

महापंचायत के अंत में लाल सिंह रायका ने सर्वसम्मति से आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार को एक माह का समय दिया जा रहा है। तय अवधि में निर्णय नहीं हुआ तो 28 जनवरी 2026 से सरगामाता मंदिर के पास, राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के निकट अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू होगा, जो परियोजना निरस्तीकरण तक जारी रहेगा।

पशुपालकों-किसानों पर सीधा असर

रायका ने कहा कि खनन से चारागाह खत्म होंगे, चारे की समस्या बढ़ेगी और धूल-प्रदूषण से खेती प्रभावित होगी। इससे पर्यावरण असंतुलन और जनस्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ेंगे।

कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा

एडवोकेट तुषार पुरोहित (वाटेरा) ने परियोजना के कानूनी व पर्यावरणीय दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए कहा कि निरस्तीकरण तक वे जनता के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।

संघर्ष समिति का आभार

खनन संघर्ष समिति ने बताया कि यह परियोजना जिले के कई गांवों को प्रभावित करेगी। इसलिए समय रहते जागरूकता और एकजुटता जरूरी है। वक्ताओं ने कहा—यह लड़ाई किसी एक समाज की नहीं, पूरे क्षेत्र और अरावली के भविष्य की है।

इनकी रही प्रमुख मौजूदगी

अमित त्रिवेदी,रमेश घांची,कसनाराम एम. देवासी,सवाराम देवासी,प्रभुराम देवासी, एडवोकेट तुषार पुरोहित,सवाराम तरुंगी, राकेश रबारी,राष्ट्रीय पशुपालन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह रायका, उपाध्यक्ष भरत सराधना,छगन देवासी (सांचोर),लक्ष्मण देवासी सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समापन संदेश:

“एकता से ही बचेगी अरावली—खनन परियोजना का निरस्तीकरण ही लक्ष्य है।”