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सिरोही जिले में प्रस्तावित कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की 800.9935 हेक्टेयर भूमि पर आधारित मेटाकास्ट खनन परियोजना के विरोध में चल रहा जन आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।
भारजा गांव में आयोजित खनन संघर्ष समिति की बैठक में क्षेत्रवासियों का ऐसा विशाल जनसैलाब उमड़ा कि जिला प्रशासन को स्वयं मौके पर पहुंचना पड़ा।
बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी परिस्थिति में यह खनन परियोजना स्वीकार नहीं की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र के जल स्रोतों, चारागाह भूमि, कृषि और पर्यावरण के लिए विनाशकारी सिद्ध होगी।
प्रशासन की मौजूदगी में जनता का दो-टूक संदेश
बैठक में जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारेलाल शिवरान सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के समक्ष ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे अपने जल, जमीन और जंगल की कीमत पर किसी भी औद्योगिक या खनन परियोजना को स्वीकार नहीं करेंगे।
निर्मल चौधरी की मौजूदगी से आंदोलन को मिली नई धार
बैठक में राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एवं चर्चित छात्र नेता निर्मल चौधरी की मौजूदगी से आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।
निर्मल चौधरी ने मंच से ऐलान किया कि 28 जनवरी को होने वाले आंदोलन में वे स्वयं भाग लेंगे और जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
उन्होंने कहा—
“यह सिर्फ किसी एक गांव का मुद्दा नहीं है, यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। अगर सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़नी पड़ी तो गोली खाने के लिए सबसे पहले मैं आगे खड़ा रहूंगा।”
‘जल-जमीन-जंगल’ की रक्षा के लिए संघर्ष का संकल्प
निर्मल चौधरी ने चेतावनी दी कि खनन परियोजनाओं के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों को उजाड़ने की नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जनता की आवाज नहीं सुनी गई, तो यह आंदोलन पूरे राजस्थान में फैलाया जाएगा।
सभा स्थल पर ‘खनन नहीं चलेगा’ और ‘जल-जमीन-जंगल बचाओ’ के नारों से माहौल गूंज उठा।
किसान व पशुपालक संगठनों का खुला समर्थन
बैठक में भारतीय किसान संघ, पशुपालक संघ सहित कई ग्रामीण संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
पशुपालक संघ के लाल सिंह रायका ने कहा कि खनन परियोजना से चारागाह भूमि नष्ट होगी, जिससे पशुपालन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो जाएगी।
भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री के नाम अंतिम अल्टीमेटम ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा। मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को दिया जनआधार
बैठक में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी ने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिया। महिलाओं ने कहा कि खनन से पानी के स्रोत सूख जाएंगे, जिसका सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ेगा।
उन्होंने साफ कहा कि वे अपने बच्चों का भविष्य खतरे में नहीं डालेंगी।
28 जनवरी से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
खनन संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही परियोजना निरस्त नहीं की, तो 28 जनवरी 2026 से सरगामाता मंदिर के पास अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया जाएगा। आवश्यकता पड़ी तो इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन में बदला जाएगा।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
पशुपालक संघ, किसान संगठन, छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता खुलकर जनता के समर्थन में आ चुके हैं। आंदोलन दिन-प्रतिदिन तेज होता जा रहा है और प्रशासन व सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
क्षेत्र की जनता ने सरकार को साफ अल्टीमेटम दिया है—
या तो खनन परियोजना निरस्त करो, नहीं तो जन आंदोलन के लिए तैयार रहो।