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सिरोही

प्रकाशित: 04 Jan 2026

सिरोही | 28 जनवरी के महा आंदोलन को मेघवाल समाज का पूर्ण समर्थन

मांडवाड़ा खालसा में हुई समाज की बैठक, समर्थन पत्र जारी कर हर संभव सहयोग का ऐलान

सिरोही जिले में प्रस्तावित कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना के विरोध में चल रहा जन आंदोलन अब निर्णायक चरण में प्रवेश करता नजर आ रहा है। गांव-गांव और समाज-समाज से मिल रहे व्यापक समर्थन के बीच भीतरोट परगना के मेघवाल समाज ने भी आगामी 28 जनवरी 2026 को प्रस्तावित महा आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा कर दी है।

शनिवार को मांडवाड़ा खालसा गांव में आयोजित मेघवाल समाज की अहम बैठक के बाद समाज की ओर से एक औपचारिक समर्थन पत्र जारी किया गया। पत्र में आंदोलन को हर स्तर पर सहयोग देने का संकल्प दोहराया गया। समाज ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल किसी एक गांव या समाज तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण, जल संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

36 कौम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष का संकल्प

समर्थन पत्र में मेघवाल समाज ने कहा कि वह इस जन आंदोलन में 36 कौम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। प्रभावित ग्राम पंचायतों और पीड़ित ग्रामीणों को किसी भी परिस्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

समाज ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक यह विनाशकारी खनन परियोजना पूरी तरह निरस्त नहीं होती, तब तक आंदोलन के साथ उनका समर्थन और सक्रिय भागीदारी जारी रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर हर स्तर पर लोकतांत्रिक संघर्ष किया जाएगा।

पर्यावरण, जल और ग्रामीण जीवन पर मंडराता खतरा

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना से क्षेत्र की हरियाली, भूजल स्तर, कृषि भूमि और ग्रामीण जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा। खनन के कारण धूल प्रदूषण, जल संकट और विस्थापन जैसी समस्याएं सामने आएंगी, जिसका सबसे अधिक असर गरीब, किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ेगा।

समाज के वरिष्ठ जनों ने इसे विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट करार देते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाओं को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इतिहास का सबसे बड़ा जन आंदोलन बनने की ओर

खनन परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार जनसमर्थन हासिल कर रहा है। इससे पहले राजपुरोहित समाज, माली समाज सहित कई सामाजिक संगठनों के समर्थन के बाद अब मेघवाल समाज के समर्थन से आंदोलन और अधिक व्यापक और मजबूत हो गया है।

आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि 28 जनवरी को प्रस्तावित महा आंदोलन सिरोही जिले के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा जन आंदोलन साबित होगा—एक ऐसा आंदोलन जिसमें हर वर्ग, हर समाज और हर पीड़ित परिवार की आवाज एक साथ गूंजेगी।

खनन संघर्ष समिति ने जताया आभार

मेघवाल समाज के समर्थन पर खनन संघर्ष समिति ने आभार व्यक्त किया है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि समाज का यह निर्णय आंदोलन को नई ऊर्जा देगा और यह साबित करता है कि जनता अब अपने हक और अधिकारों को लेकर पूरी तरह जागरूक हो चुकी है।

समिति ने अन्य समाजों और संगठनों से भी अपील की है कि वे इस सर्व समाज के जन आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि सरकार और प्रशासन तक जनता की एकजुट और मजबूत आवाज पहुंच सके।

जनता का साफ संदेश—खनन किसी भी कीमत पर नहीं

बैठक में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि चाहे कितनी भी बड़ी कंपनियां हों या कितना भी दबाव बनाया जाए, कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना को क्षेत्र में लागू नहीं होने दिया जाएगा।

जनता का स्पष्ट संदेश है—

“विकास के नाम पर विनाश स्वीकार नहीं,

धरती, पानी और जीवन से कोई समझौता नहीं।”

सर्व समाज की एकजुटता के साथ यह आंदोलन अब केवल विरोध नहीं, बल्कि जन चेतना और जन अधिकारों का सशक्त प्रतीक बनता जा रहा है।