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सिरोही

प्रकाशित: 17 Nov 2025

सिरोही पोकरण विधायक प्रताप पुरी और संघ प्रचारक को सौंपा ज्ञापन

संघर्ष समिति ने कमलेश मेटाकास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना निरस्त करने की रखी मांग

सिरोही। पिण्डवाड़ा क्षेत्र में मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्रा. लि. की प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध को लेकर आंदोलनरत ग्रामीणों ने शनिवार शाम बड़ा कदम उठाया। स्वतंत्रता सेनानी एवं जनजाति समाज के आराध्य बिरसा मुंडा जयंती एवं भजन संध्या कार्यक्रम के दौरान संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने पोकरण विधायक संत प्रताप पुरी महाराज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक संजीव कुमार, व दिनेश राजपुरोहित को ज्ञापन सौंपकर परियोजना को तत्काल निरस्त करवाने की मांग रखी।

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों के 12 गांवों के लोग पिछले करीब दो महीनों से आंदोलनरत हैं। कई बार धरने–प्रदर्शन, घेराव और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। प्रतिनिधियों ने आग्रह किया कि सरकार की चुप्पी से क्षेत्र की जनता बेहद आहत है, ऐसे में विधायक और संघ नेतृत्व हस्तक्षेप कर खनन परियोजना को तत्काल रोके, जिससे क्षेत्र को राहत मिल सके।

विधायक प्रताप पुरी का बड़ा बयान

कार्यक्रम में संबोधित करते हुए विधायक प्रताप पुरी ने कहा कि जनजाति समाज के चौहान, सिसोदिया, परमार, सोलंकी जैसे कई गोत्र मूल रूप से क्षत्रिय परंपरा से जुड़े रहे हैं। इतिहास यह सिद्ध करता है कि जनजाति समाज, क्षत्रिय वंश परंपरा का अभिन्न अंग है।

देश-विरोधी ताकतें जनजाति समाज को भ्रमित कर रही”संत गुलाब दास

फलासिया से पधारे संत गुलाब दास महाराज ने कहा कि मिशनरी, कम्युनिस्ट और अन्य देश-विरोधी तत्व जनजाति समाज को उसकी जड़ों से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। आदिवासी समाज सदैव से सनातन संस्कृति का हिस्सा रहा है, इसलिए अपनी परंपरा और विरासत को पहचानने की आवश्यकता है।

भव्य आयोजन, 30 से अधिक भजन मंडलियों की प्रस्तुति

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आई 30 से अधिक जनजाति भजन मंडलियों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। मंच पर वनवासी समाज के अनेक मठ–मंदिरों से आए संत–महात्माओं का सम्मान किया गया।

संघ और संबंधित संगठनों की उपस्थिति

इस अवसर पर विभाग प्रचारक संजीव कुमार, वनवासी कल्याण परिषद के जगदीश कुलमी, संघ के दिनेश पुरोहित सहित वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम की व्यवस्थाएं वनवासी कल्याण परिषद, एकल अभियान और भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं ने संभालीं।