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प्रकाशित: 02 Nov 2025

सिरोही:वाटेरा में ग्रामीण सेवा शिविर का बहिष्कार, ग्रामीण थम्ब बाबा मंदिर प्रांगण में बैठे धरने पर

प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में तीसरे गांव ने भी जताया विरोध, एक भी ग्रामीण नहीं पहुंचा शिविर स्थल पर

सिरोही। पिण्डवाड़ा उपखण्ड के वाटेरा गांव में शनिवार को प्रशासन द्वारा आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर का ग्रामीणों ने पूर्ण रूप से बहिष्कार किया। सुबह से ही ग्रामीण थम्ब बाबा मंदिर प्रांगण में एकत्र होकर धरने पर बैठ गए और प्रस्तावित चूना खनन परियोजना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

यह लगातार तीसरा गांव है, जहां ग्रामीणों ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी प्रशासन गांवों के संग अभियान के तहत आयोजित शिविर का विरोध किया है। इससे पहले भारजा और रोहिड़ा गांवों में भी ग्रामीणों ने शिविरों से दूरी बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया था।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यह खनन परियोजना उनकी जमीन, पर्यावरण और आजीविका पर सीधा हमला है।

शिविर स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों को ग्रामीणों की अनुपस्थिति के कारण खाली पड़ी कुर्सियों का सामना करना पड़ा। वहीं ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन उनकी आवाज को अनसुना कर रहा है, लेकिन अब वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

अधिकारियों ने की समझाइश, ग्रामीण अड़े रहे

भावरी नायब तहसीलदार नैनाराम मौके पर थम्ब बाबा मंदिर प्रांगण पहुंचे, जहां सैकड़ों ग्रामीण धरने पर बैठे थे। उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता कर समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक खनन परियोजना को निरस्त करने की लिखित घोषणा नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

ग्रामीणों ने राष्ट्रपति के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें 800.9935 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रस्तावित खनन परियोजना को पूर्ण रूप से निरस्त करने की मांग की गई है।

क्षेत्र में आक्रोश

धरने में वाटेरा ग्राम पंचायत की प्रशासक सविता देवी, ग्रामीण संघर्ष समिति के प्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा कि यह आंदोलन अब पूरे क्षेत्र का आंदोलन बन चुका है और यदि प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन उग्र होगा।

ग्रामीणों का चेतावनी भरा ऐलान

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन अब उनके अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।