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Today sirohi-hindi-News Rajasthan : कम अंक मिलने से भड़के विद्यार्थी,ALU के कुलपति के नाम प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन

सिरोही | 14-Dec-2025 09:54 AM | 317 |
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कम अंक मिलने से भड़के विद्यार्थी,ALU के कुलपति के नाम प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन

सिरोही:विधि शिक्षा पर सवाल,छात्रो में आक्रोश LL.M फ़ाइनल ईयर के परीक्षा परिणामों पर उठा बवाल

कम अंक मिलने से भड़के विद्यार्थी,ALU के कुलपति के नाम प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन

सिरोही।मा अम्बे के.पी. संघवी राजकीय विधि महाविद्यालय, सिरोही में एलएलएम फाइनल ईयर  के विद्यार्थियों ने वर्ष 2024–25 के परीक्षा परिणामों पर गंभीर आपत्ति जताई है। विद्यार्थियों का आरोप है कि घोषित परिणाम उनकी अपेक्षाओं के विपरीत हैं, विशेष रूप से डिसेर्टेशन में असामान्य रूप से कम अंक दिए गए हैं, जिससे छात्रों में भारी रोष है।

डिसेर्टेशन में मेहनत, लेकिन अंक बेहद कम

विद्यार्थियों ने बताया कि एलएलएम पाठ्यक्रम में डिसेर्टेशन सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक घटक होता है। इसके लिए महीनों तक शोध, विषय चयन, डाटा कलेक्शन, केस लॉ अध्ययन और विश्लेषण किया गया। इसके बावजूद अधिकांश विद्यार्थियों को डिसेर्टेशन में ऐसे अंक मिले, जो न तो उनके कार्य की गुणवत्ता के अनुरूप हैं और न ही पूर्व वर्षों के मूल्यांकन मानकों से मेल खाते हैं।

आर्थिक बोझ भी बना चिंता का कारण

छात्रों का कहना है कि डिसेर्टेशन तैयार कराने की प्रक्रिया उनके लिए आर्थिक रूप से भी भारी पड़ी। एडिटिंग, करेक्शन, प्रिंटिंग और बिंडिंग के लिए कई विद्यार्थियों को उदयपुर तक जाना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया में प्रति विद्यार्थी लगभग ₹3000 से ₹6000 तक खर्च हुआ। इतनी मेहनत और खर्च के बाद कम अंक मिलना निराशाजनक है।

शैक्षणिक भविष्य पर पड़ सकता है असर

विद्यार्थियों ने आशंका जताई कि कम अंक उनके शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। एलएलएम के अंक पीएचडी प्रवेश, NET/JRF जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की पात्रता और मेरिट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में परिणामों का यह स्वरूप कई विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा और शोध के सपनों पर पानी फेर सकता है।

मूल्यांकन की पारदर्शिता पर सवाल

छात्रों का आरोप है कि डिसेर्टेशन जैसे शोधपरक कार्य में विषय की गहराई, शोध पद्धति, संदर्भों का समुचित उपयोग और मौलिक विश्लेषण के आधार पर अंक दिए जाने चाहिए, लेकिन वर्तमान परिणामों से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी प्रतीत होती है।

पुनर्मूल्यांकन की मांग

इन्हीं मांगों को लेकर एलएलएम विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति के नाम कॉलेज प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विशेष रूप से डिसेर्टेशन सहित उत्तरपुस्तिकाओं का निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन कराने और मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

शांतिपूर्ण तरीके से रखा पक्ष

ज्ञापन सौंपते समय विद्यार्थियों ने शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से अपनी बात रखी। इस दौरान कृष्णपाल सिंह, बंटू सिंह, आकांक्षा ओझा, चेतना सुथार, मुकेश कुमार और प्रद्युम्न आर्य सहित अन्य विद्यार्थी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे टकराव नहीं, बल्कि न्यायसंगत और निष्पक्ष मूल्यांकन चाहते हैं।

विद्यार्थियों को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और शीघ्र निर्णय लेकर राहत प्रदान करेगा। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, जो आने वाले वर्षों के विद्यार्थियों के लिए अहम होगा

 

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