निलंबित ग्राम विकास अधिकारी की वापसी के विरोध में लामबंद हुए पलाई के ग्रामीण
उनियारा उपखंड की ग्राम पंचायत पलाई में प्रशासनिक लापरवाही के चलते विकास और सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले करीब एक महीने से ग्राम पंचायत में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे नाराज होकर आज सरपंच और ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर टोंक को ज्ञापन सौंपा है।
क्या है पूरा मामला ?
सरपंच और ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, राज्य सरकार के आदेश पर 19 दिसंबर 2025 को पलाई की तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी (VDO) रमेश प्रजापत को निलंबित कर पंचायत समिति मुख्यालय टोंक में उपस्थिति देने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद, विकास अधिकारी उनियारा ने आदेश जारी कर शैलेंद्र सिंह को पलाई का नया ग्राम विकास अधिकारी नियुक्त किया।
नए अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने 26 दिसंबर 2025 को कार्यभार संभालने के लिए जॉइनिंग भी दे दी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 25 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें अब तक ग्राम पंचायत का आधिकारिक चार्ज नहीं सौंपा गया है।
विकास कार्य ठप, गंदगी का अंबार
चार्ज न मिलने के कारण ग्रामीणों के जरूरी काम अटक गए हैं। गांव में विकास कार्य और सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निलंबित वीडीओ की वापसी का विरोध
ज्ञापन में ग्रामीणों ने पूर्व वीडीओ रम्भा प्रजापत की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि अपने 2 साल के कार्यकाल में वे 2 बार निलंबित और एक बार एपीओ (APO) हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बहाली के बाद राजनीतिक रसूख या द्वेषता के चलते उन्हें वापस पलाई ग्राम पंचायत में ही नियुक्त कर दिया जाता है, जो कि नियम विरुद्ध है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि:
भविष्य में यदि रम्भा प्रजापत बहाल होती हैं, तो उन्हें वापस पलाई ग्राम पंचायत में नियुक्त न किया जाए।
नव-नियुक्त वीडीओ शैलेंद्र सिंह को 2 दिवस के भीतर चार्ज दिलाया जाए।
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि दो दिन में समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो मजबूर होकर समस्त ग्रामवासी आंदोलन करेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में सरपंच प्रतिनिधि सहित रामदेव, किशन, भगवान सहाय, रामकेश धाकड़ और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।