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घुमंतू लखेरा समाज ने मांगा हक: मिले राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक संबल

प्रकाशित: 28 Dec 2025

​टोक। लखेरा, लखारा (लक्षकार) समाज को राजनीतिक, व्यावसायिक, सामाजिक और शैक्षणिक प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने की मांग को लेकर समाज के प्रतिनिधियों ने टोंक दौरे पर आए राजस्थान ओबीसी आयोग के सदस्य मोहन मोरवाल को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समाज ने 'लखेरा/लखारा कल्याण बोर्ड' के गठन और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में समाज को शामिल करने की पुरजोर वकालत की है।

​अखिल भारतीय हिन्दू लखेरा समाज युवा मंच के प्रदेशाध्यक्ष कन्हैया लखेरा (अलीगढ़), अखिल राजस्थान हिन्दू लखेरा महासभा के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट गोवर्धन लक्षकार (पचेवर) और शंकर लखेरा (टोंक) ने बताया कि लखेरा जाति राजस्थान सहित पूरे देश में बहुतायत में निवास करती है। समाज का मुख्य पारंपरिक कार्य लाख की चूड़ियां बनाकर बेचना है, लेकिन सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में यह हस्तकला अब संकट में है।

पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सरकारी संबल की दरकार:

ज्ञापन में अवगत कराया गया कि लखेरा समाज आज भी गांव-गांव, ढाणी-ढाणी घूमकर चूड़ियां बेचने का कार्य करता है। घुमंतू प्रकृति और आर्थिक विपन्नता के कारण यह जाति अत्यंत पिछड़ी श्रेणी में है। समाज के प्रतिनिधियों ने दुख जताया कि आज तक इस समाज के लिए कोई विशेष सरकारी संबल योजना लागू नहीं की गई है, जिससे यह पारंपरिक व्यवसाय विकसित नहीं हो सका है।

राजनीतिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता पर जोर:

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि देश की राजनीति, पार्टी संगठनों, नगर निकायों और विभिन्न सरकारी आयोगों में लखेरा समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। समाज के व्यवसाय को उन्नत बनाने और गरीबी दूर करने के लिए राज्य सरकार के आर्थिक सहयोग की मांग की गई। उन्होंने आग्रह किया कि अन्य समाजों की तर्ज पर कल्याण बोर्ड का गठन कर और समाज को विश्वकर्मा योजना से जोड़कर हस्तशिल्पियों को आत्मनिर्भर बनाया जाए, जिससे समाज देश के आर्थिक विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।