*जिंदा इंसानों को कागजों में “मार” दिया गया**सचिव पर कार्रवाई, पर सिस्टम पर उठे सबसे बड़े सवाल ?*मध्य प्रदेश के छतरपुर से सामने आया ये मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और श...
*जिंदा इंसानों को कागजों में “मार” दिया गया*
*सचिव पर कार्रवाई, पर सिस्टम पर उठे सबसे बड़े सवाल ?*
मध्य प्रदेश के छतरपुर से सामने आया ये मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और शक के घेरे में खड़ी कार्यप्रणाली की कहानी बयां कर रहा है
कार्रवाई हुई है, लेकिन क्या न्याय भी होगा ?
मामला गौरिहार विकासखंड की ग्राम पंचायत चंद्रपुरा का है, जहां आरोप है कि जनपद CEO पंचायत सचिव ने मिलकर तीन जीवित ग्रामीणों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए, नतीजा जिंदा लोग सरकारी कागजों में “मृत” हो गए,
पेंशन बंद… राशन बंद… और योजनाओं का लाभ भी खत्म…
गांव की गिरजा विश्वकर्मा और रामबाई रैकवार जैसी महिलाएं जो आज भी सांस ले रही हैं, लेकिन कागजों में मृत घोषित कर दी गईं।
वहीं पंचायत के भ्रत्य रहे कल्लू अहिरवार को भी “मृत” दिखाकर उनका वेतन रोक दिया गया,
जब पीड़ितों ने आवाज जिला प्रशासन तक पहुंचाई तो जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया ने जांच के निर्देश दिए,
और जांच के बाद पंचायत सचिव अमर सिंह को निलंबित कर दिया गया,
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होते हैं.......
क्या इतने बड़े खेल में सचिव अकेले दोषी है ?
या फिर सचिव अमर सिंह को ही सुनियोजित तरीके से एक बड़ी साजिश का मोहरा बनाया जा रहा है ?
क्योंकि सवाल सिर्फ एक हस्ताक्षर का नहीं है
सवाल उस पूरे सिस्टम का है, जहां बिना जांच के किसी को “मृत” घोषित कर दिया जाता है
और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती,
अगर इस मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच की गई, तो यकीनन कई परतें खुलेंगी, और वो चेहरे भी सामने आएंगे, जो पर्दे के पीछे रहकर इस खेल को अंजाम देते हैं,
और एक बड़ा सवाल ये भी
अब तक इस मामले में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई ?
जबकि जिंदा लोगों को मृत दिखाना और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना सिर्फ प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य है,
क्या निलंबन ही अंतिम कार्रवाई है ?
या फिर कानून भी अपना काम करेगा ?
कार्रवाई की शुरुआत जरूर हुई है
लेकिन सिस्टम पर लगा ये दाग सिर्फ एक सस्पेंशन से नहीं धुलेगा,
जब तक सच्चाई की पूरी तह तक नहीं पहुंचा जाएगा, और हर जिम्मेदार चेहरे को बेनकाब नहीं किया जाएगा,
तब तक ये सवाल जिंदा रहेंगे,
कि आखिर इस सिस्टम में, जिंदा इंसान कब तक कागजों में मरते रहेंगे ?