गोरखपुर, 10 सितंबर। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। यदि कोई मनुष्य अयोग्य है तो इसका अर्थ है कि उसे योग्य गुरु नहीं मिला।...
गोरखपुर, 10 सितंबर। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। यदि कोई मनुष्य अयोग्य है तो इसका अर्थ है कि उसे योग्य गुरु नहीं मिला। उन्होंने कहा कि योग्य गुरु मिलने पर कोई भी मनुष्य अयोग्य नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
सीएम योगी ने कहा कि साधु का समाज ही उसका परिवार होता है और उसकी जाति केवल सनातन होती है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ दोनों संतों ने राष्ट्र और समाज को दिशा दी। उनके संकल्पों के परिणामस्वरूप ही आज अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण संभव हो सका।
मुख्यमंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि वह गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक क्रांति के पुरोधा थे। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया। गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी उनका अहम योगदान रहा।
सीएम योगी ने कहा कि गुलामी के प्रतीकों को हटाने का संकल्प महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ जी ने लिया था। दोनों का सपना था कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बने और आज वह संकल्प पूरा हुआ।
श्रद्धांजलि सभा में अयोध्या से आए डॉ. रामविलास वेदांती ने कहा कि अगर महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ न होते तो राम मंदिर आंदोलन संभव ही नहीं था। वहीं, जगद्गुरु स्वामी वासुदेवाचार्य और डॉ. रामकमलाचार्य ने भी दोनों संतों को सामाजिक समरसता और राम मंदिर आंदोलन का अग्रदूत बताया।
कार्यक्रम में अनेक संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर सीएम योगी ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।