गोरखपुर, 28 अगस्त।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति गोरखपुर ने आरोप लगाया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन का गठन विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की साजिश का हिस्सा है, जिस पर मुख्य रूप से निजी घर...
गोरखपुर, 28 अगस्त।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति गोरखपुर ने आरोप लगाया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन का गठन विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की साजिश का हिस्सा है, जिस पर मुख्य रूप से निजी घरानों और स्मार्ट मीटर सप्लायर्स का नियंत्रण है। समिति ने कहा कि यह संस्था विद्युत उपभोक्ताओं के हितों की बजाय निजी कंपनियों के हित में काम कर रही है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने देश के विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर मांग की है कि डिस्कॉम एसोसिएशन के गठन और निजीकरण की गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और निजीकरण का फैसला रद्द किया जाए। फेडरेशन का कहना है कि निजीकरण और स्मार्ट मीटर के नाम पर बड़ा घोटाला चल रहा है।
भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव ई.ए.एस. शर्मा ने भी फेडरेशन को मेल भेजकर आशंका जताई है कि डिस्कॉम एसोसिएशन स्मार्ट मीटर सप्लायर्स और निजीकरण की लॉबिंग करने वाली संस्था है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि पूर्व विद्युत सचिव आलोक कुमार इस संस्था से क्यों जुड़े हुए हैं।
इस बीच फेडरेशन ने पूरे देश के बिजली इंजीनियरों को सचेत करते हुए कहा है कि वे डिस्कॉम एसोसिएशन की गतिविधियों से दूर रहें। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि निजीकरण के पीछे बड़े घोटाले की आशंका है और इस संस्था के साथ जुड़ना खतरनाक साबित हो सकता है।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल पी. रत्नाकर राव ने कहा कि डिस्कॉम एसोसिएशन में बिजली वितरण में काम करने वाली निजी कंपनियां शामिल हैं, जो सरकारी निगमों से संवेदनशील डेटा और सूचनाएं लेकर निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं।
गोरखपुर संघर्ष समिति के पदाधिकारियों सी.बी. उपाध्याय, इस्माइल खान, पुष्पेन्द्र सिंह, जीवेश नन्दन, जयप्रकाश कुशवाहा, प्रिया सिंह, राजेश कुमार, अमित यादव, विजय सिंह, संजय सिंह, आदित्य मिश्रा, नागेंद्र सिंह, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, संदीप श्रीवास्तव, विमलेश पाल, राकेश चौरसिया, कृष्णानंद गुप्ता, संतोष कुमार, करुणेश त्रिपाठी, सुधा शर्मा, हिमांशु सोनी, शुभम, राजेंद्र प्रसाद सिंह, दिलदार यादव आदि ने कहा कि यदि निजीकरण का निर्णय रद्द नहीं किया गया तो किसानों और उपभोक्ताओं के साथ मिलकर व्यापक जन जागरण और आंदोलन चलाया जाएगा।
आज प्रदेशभर के सभी जिलों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों ने 274वें दिन भी विरोध प्रदर्शन किया और संकल्प लिया कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।