लखीमपुर खीरी के चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जमुनाबाद में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल (ऑयल सीड्स) योजना के अंतर्गत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अध्यक्ष डॉ. एस. के. विश्वकर्मा ने किसानों को बाजारोन्मुखी फसलों, विशेषकर तिलहन के वैज्ञानिक प्रबंधन की सलाह दी तथा उत्पादन लागत कम करने के उपाय बताए।
सस्य वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन ने सरसों की बुवाई के 25–30 दिन बाद विरलीकरण तथा कीट नियंत्रण हेतु जैविक कीटनाशकों के उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मो. सोहेल ने मौसम में परिवर्तन के दौरान खेत की नियमित निगरानी पर जोर दिया। पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. एन. के. त्रिपाठी ने बताया कि तिलहन के बेहतर उत्पादन के लिए मृदा में जीवांश पदार्थ आवश्यक है, जिसे पशुपालन से बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने सल्फर की कमी दूर करने के लिए खेत में जिप्सम का उपयोग करने की सलाह दी।
कार्यक्रम में गोला-कुंभी, पसगवां और पलिया क्षेत्र के किसानों ने भाग लेकर तिलहन उत्पादन और वितरण से जुड़ी आधुनिक तकनीकें प्राप्त कीं।