मध्यप्रदेश के मुरैना ज़िले में स्थित प्राचीन ककनमठ मंदिर एक बार फिर इतिहासप्रेमियों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। लगभग एक हज़ार वर्ष पुराना यह मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य ...
मध्यप्रदेश के मुरैना ज़िले में स्थित प्राचीन ककनमठ मंदिर एक बार फिर इतिहासप्रेमियों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। लगभग एक हज़ार वर्ष पुराना यह मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य शैली और रहस्यमयी बनावट के कारण देश-विदेश में पहचान बना रहा है। ककनमठ मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कच्छपघात वंश के शासकों द्वारा कराया गया माना जाता है। यह भगवान शिव को समर्पित है और विशेष बात यह है कि यह विशाल पत्थरों से बना होने के बावजूद बिना किसी गारे (सीमेंट) के आज भी मजबूती से खड़ा है। यही कारण है कि इसे भारतीय प्राचीन इंजीनियरिंग का चमत्कार कहा जाता है।स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, ककनमठ की ऊँचाई, संतुलन और पत्थरों की जटिल नक्काशी उस समय की उन्नत वास्तुकला का प्रमाण है। मंदिर का हर स्तंभ और शिखर शिल्पकला की उत्कृष्टता को दर्शाता है। हाल के समय में प्रशासन और पर्यटन विभाग की पहल से ककनमठ को हेरिटेज टूरिज्म सर्किट में शामिल करने की दिशा में प्रयास तेज़ हुए हैं।
लेकिन पहुंच मार्ग और कई प्रकार की यात्री मूलभूत सुविधा का अभाव होने के कारण यह मंदिर अनदेखी का शिकार हुआ जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि ककनमठ में एक विशेष आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है कुछ रहस्य भी यहां प्रचलित है कि यह मंदिर भूतों ने एक रात में बनवाया था लेकिन इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। कुल मिलाकर, मुरैना का ककनमठ न सिर्फ़ एक मंदिर है, बल्कि यह भारत की प्राचीन वैज्ञानिक सोच, आस्था और कला का अमूल्य धरोहर है।