अलीगढ़ में ऑटो-टिर्री पर शहर में प्रवेश प्रतिबंध से चालकों की रोज़ी-रोटी पर गहरा संकट
अलीगढ़ में नगर निगम और नगर आयुक्त के आदेश पर शहर के अंदर ऑटो-टिर्री (शेयरिंग थ्री-व्हीलर) के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध ने सैकड़ों चालकों और उनके परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर डाला है। इस फैसले के बाद रोज़ कमाकर अपना घर चलाने वाले चालक अब आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और उनकी आय लगभग खत्म हो चुकी है।
पहले ऑटो-टिर्री चालक शहर के मुख्य बाजारों, रेलवे स्टेशन और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सवारी लेकर रोज़ाना 500 से 800 रुपये तक कमा लेते थे, जिससे उनका घर खर्च किसी तरह चल जाता था। लेकिन प्रतिबंध लागू होने के बाद उन्हें शहर की सीमाओं के बाहर ही सवारी ढूंढनी पड़ रही है, जहां यात्रियों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में उनकी दैनिक आय घटकर 100 से 200 रुपये तक रह गई है, जो परिवार के खर्च के लिए बिल्कुल नाकाफी है।
चालकों का कहना है कि उन्होंने अपने वाहन बैंक या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेकर खरीदे हैं और हर महीने 5,000 से 10,000 रुपये तक की किस्त (EMI) भरनी होती है। अब आमदनी बंद होने के कारण वे किस्तें चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं और डिफॉल्टर बनने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। फाइनेंस कंपनियों की ओर से लगातार कॉल और दबाव भी उनकी परेशानी को और बढ़ा रहा है।
इस प्रतिबंध का असर केवल चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कई घरों में राशन तक की कमी हो गई है और बच्चों की स्कूल फीस जमा न होने के कारण उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। एक चालक की पत्नी ने बताया कि घर में खाने तक के पैसे नहीं हैं और बच्चों की फीस भरना तो दूर की बात हो गई है।
ऑटो-टिर्री चालकों ने मांग की है कि उन्हें शहर के कुछ निर्धारित मार्गों पर चलने की अनुमति दी जाए या फिर उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उनका कहना है कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो सैकड़ों परिवारों को और गहरे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।