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आस्था की लहरों में डूबा जिला, शिवमय हुआ जन-जन

प्रकाशित: 15 Feb 2026

अनूपपुर।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पूरा जिला भक्ति और उत्साह से सराबोर नजर आया। मंदिरों की घंटियों, मंत्रोच्चार और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर रही।
सबसे बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बना नर्मदा उद्गम, जहां तीर्थकोटि सरोवर में करीब 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान कर भगवान शिव और माता नर्मदा का जलाभिषेक किया। भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं, और पूरे वातावरण में भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
पवित्र नगरी अमरकंटक में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। 250 से अधिक पुलिस जवान सीसीटीवी और वॉच टावर से निगरानी करते रहे। महाशिवरात्रि के साथ ही यहां 14 से 18 फरवरी तक चलने वाले भव्य मेले का शुभारंभ भी हुआ, जिसका उद्घाटन पूर्व जनपद अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम ने किया।
इधर, जालेश्वर धाम में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। मान्यता के अनुसार इसी दिन सृष्टि की रचना और भगवान शिव-पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था, इसलिए यहां विशेष पूजा-अर्चना का महत्व और बढ़ जाता है।
जिला मुख्यालय अनूपपुर के विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और भंडारों का आयोजन हुआ। भक्तों ने बेलपत्र, धतूरा और मदार के फूल अर्पित कर भोलेनाथ से सुख-समृद्धि की कामना की।
वहीं ऐतिहासिक केवई नदी तट स्थित प्राचीन शिवलहरा मंदिर में दो दिवसीय मेले की शुरुआत हुई, जहां श्रद्धालुओं ने स्नान कर प्राचीन शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
उधर तुर्राधाम में भक्ति का अनूठा उत्सव देखने को मिला। भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई, जिसमें युवा से लेकर बुजुर्ग तक झूमते-गाते शामिल हुए।
पूरे जिले में पुलिस प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक दर्शन-पूजन किया। महाशिवरात्रि के इस दिव्य पर्व ने एक बार फिर आस्था, संस्कृति और उत्सव की अद्भुत एकता का संदेश दिया।