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दद्दू प्रसाद -राजा भैया की कथित साजिश बेनकाब,पत्रकारों पर रंगदारी का आरोप -CBI जांच की मांग

प्रकाशित: 07 Oct 2025

बांदा। जिला मुख्यालय में आयोजित एक सनसनीखेज प्रेस वार्ता ने सोमवार को स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी। पत्रकारों और पूर्व मंत्री डॉ. सुरेंद्र पाल वर्मा के पुत्र महेंद्र पाल वर्मा ने बसपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री व वर्तमान सपा नेता दद्दू प्रसाद यादव तथा स्थानीय युवक राजा भैया यादव पर रंगदारी की झूठी साजिश रचने और पत्रकारों को फंसाने का आरोप लगाया।
प्रेस वार्ता में मौजूद पत्रकारों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दुश्मनी के चलते उन्हें डराने-धमकाने और झूठे मुकदमों में उलझाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दस्तावेज़ों और वीडियो प्रमाणों के साथ CBI या SIT जांच की मांग की।

“राजनीतिक सफाया करने की कोशिश” — महेंद्र पाल वर्मा

वार्ता के दौरान सबसे तीखा हमला महेंद्र पाल वर्मा ने सपा नेता दद्दू प्रसाद पर बोला। उन्होंने कहा,

“दद्दू प्रसाद 2027 के विधानसभा चुनाव में मेरा राजनीतिक सफाया करने के लिए बेताब है। उसने राजा भैया को अपना मोहरा बनाकर गंदी साजिश रची है। यह व्यक्तिगत दुश्मनी का काला खेल है।”
वर्मा ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है, जिसमें पत्रकारों और निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने की तैयारी की जा रही है।

“पत्रकारिता दबाने की कोशिश असफल होगी” — अनवर राजा रानू

पत्रकार अनवर राजा रानू ने आरोपों का खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें लगातार धमकियाँ दी जा रही हैं ताकि वे सच उजागर न कर सकें।
उन्होंने गरजते हुए कहा,

“अगर खबर चलाने के लिए हमें धमकियां दी जाती हैं, तो यह भ्रम है। हमारे पास वीडियो, बयान और सबूत मौजूद हैं। मुकदमे लिखवाकर पत्रकारिता दबाने की कोशिश की जा रही है। आज मुझे निशाना बनाया गया है, कल कोई और पत्रकार शिकार बनेगा। प्रशासन निष्पक्ष जांच करे तो सब कुछ साफ हो जाएगा।”
रानू ने कहा कि पत्रकारिता को दबाने की यह कोशिश लोकतंत्र पर हमला है।

राजा भैया की “साजिश” का खुलासा — आशीष सागर दीक्षित

पत्रकार आशीष सागर दीक्षित ने दस्तावेज़ दिखाकर राजा भैया यादव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि

“राजा भैया ने उन्हीं महिलाओं के माध्यम से रंगदारी का झूठा केस बनवाया है, जो पहले भी उसके इशारे पर मेरे खिलाफ मुकदमे लिखवा चुकी हैं। यह पूरा खेल 2013 से चल रहा है, जब मैंने उसकी एनजीओ की शिकायत की थी और उसे सचिव पद से हटाया गया था।”
दीक्षित ने कहा कि राजा भैया अब फर्जी केस बनवाकर अपनी पुरानी दुश्मनी निकालने में जुटा है।
“रंगदारी के नाम पर 20 लाख की रकम दिखाना भी हास्यास्पद है। यह करोड़ों का ठग है, जिसने गरीबों के नाम पर लूट की, मगर एक गांव में मॉडल तक नहीं बनाया। अब खुद को पीड़ित दिखाने की साजिश रच रहा है,” उन्होंने कहा।

CBI जांच की मांग

वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि पुलिस की स्थानीय जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। “अतर्रा के सीओ प्रवीण यादव के नेतृत्व में निष्पक्ष जांच संभव नहीं, इसलिए सीबीआई या किसी बाहरी एजेंसी से जांच कराई जाए,” पत्रकारों ने कहा।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर साजिशों का सच सामने नहीं आया, तो पत्रकार सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

राजनीतिक गलियारों में मचा हलचल

प्रेस वार्ता के बाद जिले के राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। कई सामाजिक संगठनों और पत्रकार संघों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन अब पूरे प्रकरण की फाइलें जुटा रहा है ताकि तथ्यों की पड़ताल की जा सके।

“खाकी का इकबाल दांव पर”

पत्रकारों ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो योगी सरकार का “भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन” का दावा खोखला साबित होगा।