सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए पौराणिक जन्मस्थली का विकास ऐतिहासिक कार्य
सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए पौराणिक जन्मस्थली का विकास ऐतिहासिक कार्य : साध्वी निरंजन ज्योति
महर्षि वेदव्यास जन्मस्थान वसुधरी लसड़ा में विशाल मेला व सांस्कृतिक महोत्सव
पैलानी।महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास की पौराणिक जन्मस्थली वसुधरी लसड़ा में आयोजित विशाल मेला एवं सांस्कृतिक महोत्सव के द्वितीय दिवस पर निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार, ने सहभागिता की। उन्होंने महर्षि वेदव्यास के जीवन और कृतित्व पर आधारित आशीर्वचन देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए किसी पौराणिक जन्मस्थली का विकास करना एक ऐतिहासिक और राष्ट्रहित का कार्य है।साध्वी निरंजन ज्योति ने रामायण की सुंदर चौपाइयों के माध्यम से सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक एकता और सनातन परंपराओं को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने भगवान राम और निषादराज की मित्रता, वेदव्यास द्वारा रचित वेद, पुराण एवं उपनिषदों की महत्ता, तथा महाभारत के प्रमुख प्रसंगों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने राजधर्म, पितृधर्म, पुत्रधर्म और स्त्रीधर्म की व्याख्या करते हुए भीष्म पितामह की भीष्म प्रतिज्ञा को आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक बताया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत अयोध्या से आए कलाकारों द्वारा अवधी बधावा लोकगायन एवं लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। वहीं आराध्या गौतम सांस्कृतिक दल द्वारा भगवान राम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक की घटनाओं का जीवंत मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
मेले के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनियां लगाई गईं तथा एक मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिससे सैकड़ों लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। देर शाम तक हजारों श्रद्धालु सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम में निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर मधुरम शरण शिवा के नेतृत्व में सशस्त्र संन्यासियों की गरिमामयी उपस्थिति आकर्षण का केंद्र रही। इसके अतिरिक्त महर्षि वेदव्यास के जीवन और दर्शन पर आयोजित गोष्ठी में पूर्व जिलाधिकारी अनुराग पटेल सहित अनेक विद्वानजनों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।पूरा आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और सनातन परंपराओं के गौरवपूर्ण प्रदर्शन का साक्षी बना।