PHM NEWS

जीवन को सरल व सहज बनाकर ही भगवान की प्राप्ति संभव

प्रकाशित: 16 Jan 2026

जीवन को सरल व सहज बनाकर ही भगवान की प्राप्ति संभव : पं. धीरेंद्र शास्त्री
बांदा। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में सनातन धर्म, शिक्षा व्यवस्था, जनसंख्या और देश की मौजूदा नीतियों पर बेबाक विचार रखे। उन्होंने कहा कि जीवन को सरल और सहज बनाकर ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। हनुमानजी की कृपा से देश में सनातन धर्म के प्रति जन-जागृति आएगी और समाज पुनः अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ेगा।
पं. धीरेंद्र शास्त्री ने भारत सरकार से वैदिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए देशभर में गुरुकुल स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक हिंदू समाज के बच्चों को वेदों और भारतीय संस्कृति का ज्ञान नहीं मिलेगा, तब तक वे अपनी परंपराओं से दूर होते जाएंगे। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज बच्चों को “ग से गणेश” की बजाय “ग से गधा” पढ़ाया जा रहा है, जो चिंताजनक है।
जनसंख्या के मुद्दे पर उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर ‘बच्चे दो ही अच्छे’ का संदेश दिया जा रहा है, वहीं अन्य समुदाय अपनी जनसंख्या बढ़ा रहे हैं। ऐसे में हिंदू समाज को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने इसे संस्कृति और अस्तित्व से जुड़ा विषय बताया।
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने स्पष्ट किया कि जिन्हें हिंदू या हिंदुत्व से आपत्ति है, वे उनकी कथा या धार्मिक आयोजनों में शामिल न हों। उन्होंने कहा कि हनुमंत कथा का आयोजन चढ़ावे के लिए नहीं, बल्कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से किया जाता है।
शिक्षा सुधार को लेकर उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य किया जाए। उनका कहना था कि इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में स्वतः सुधार आएगा।
देश में युवाओं के पलायन और बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए पं. धीरेंद्र शास्त्री ने सभी राजनीतिक दलों से जातिवाद से ऊपर उठकर युवाओं के भविष्य के लिए गंभीरता से सोचने की अपील की। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। व्यवस्था पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यह देश की विडंबना है कि यहां शराब सस्ती और दवाएं महंगी हैं।
उल्लेखनीय है कि पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे चित्रकूट से बांदा पहुंचे थे। उन्होंने भगवान कामतानाथ के दर्शन व परिक्रमा कर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की प्रार्थना की और विश्वास जताया कि एक दिन यह संकल्प अवश्य पूरा होगा।